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'अज्ञेय' कवि-कथाकार-व्यंगकार-पत्रकार !


सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' को बेशक पढ़ा और जाना तो बहुतों ने पर उन्हें समझा कम लोगों ने. इसका कारण 'अज्ञेय' का विशाल व्यक्तित्व रहा है. कवि, उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, पत्रकार, संपादक अनुवादक, सैनिक, क्रांतिकारी, यायावर, दार्शनिक जैसे कई आयाम इस एक व्यक्तित्व में समाए रहे.


सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

अपनी रचनाओं में 'अज्ञेय' ने दकियानूसी और रूढ़िवादिता को जगह नहीं दी, शायद इसीलिए आलोचकों ने उनमें व्यक्तिवादी, अस्तित्ववादी और समाज विरोधी रचनाकार की छवि देखी. 'अज्ञेय' में आधुनिकता का बोध तो था ही साथ में समाज को कूपमंडूपता और कठमुल्ली मानसिकता से दूर ले जाने की चाहत भी थी. सरल व्यक्तित्व के धनी 'अज्ञेय' में सत्य की परख करने की अद्भुत क्षमता थी.

यायावरी आत्मा को समेटे 'अज्ञेय' का जीवन बहुरंगों, विवादों और चुनौतियों से भरा रहा. स्वाधीन भारत की पत्रकारिता के सफल संस्थान 'अज्ञेय' ने अपनी सीख से दर्जनों ऐसे पत्रकार बनाये जो हिंदी पत्रकारिता की पीठ सिद्ध हुए.


समाचार पत्र के रूप में 'दिनमान'

समाचार पत्र के रूप में 'दिनमान' का प्रकाशन एक ऐतिहासिक घटना थी. जिससे 'अज्ञेय' ने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी. दैनिक अखबार 'नवभारत टाइम्स' में महज़ एक साल रहते हुए भी 'अज्ञेय' ने अपनी छाप छोड़ी. रचनात्मक लेखन के रूप में पहले 'प्रतीक' और बाद में 'नया प्रतीक' का संपादन 'अज्ञेय' की सर्जनात्मक प्रतिभा का महत्वपूर्ण योगदान है.


समाचार पत्र के रूप में 'दिनमान'


'अज्ञेय' की प्रमुख कृतियाँ - कविता - भग्न दूत, चिंता, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी आदि. उपन्यास - शेखर एक जीवनी (भाग - एक, दो), नदी के द्वीप, अपने-अपने अजनबी. निबंध और पत्र - त्रिशंकु, सबरंग, आत्मनेपद आदि.