• Newziya

किसका फ़ैसला था पुलवामा हमले का जवाब ?

मंगलवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 80वाँ स्थापना दिवस था. इसी मौके पर आयोजित समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर अपने सम्बोधन में कहा कि देश पुलवामा आत्मघाती हमले में शहीद जवानों के बलिदानों को भूला नहीं है और न ही कभी भूलेगा. यह नेतृत्व का ही फैसला था कि इस हमले का जवाब “कब, कहां और कैसे” दिया जाना था. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि चाहे आतंकवाद से मुकाबला करना हो अथवा इनके मददगारों से लड़ना हो, देश इसके लिए जो भी आवश्यक कदम उठाने हैं, उनमें पूरी तरह सक्षम है.


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ( सांकेतिक तस्वीर, साभार : इंटरनेट )

आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ के योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए एनएसए डोभाल ने कहा “किसी देश में आंतरिक सुरक्षा का बहुत महत्व होता है. दूसरे विश्व युद्ध् के बाद 37 राष्ट्र या तो टूट गए या अपनी संप्रभुता खो बैठे. इनमें से 28 देशों का कारण आंतरिक संघर्ष था. देश यदि कमजोर होते हैं तो उसकी वजह कहीं न कहीं आंतिरक सुरक्षा की कमी होती है. आंतरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व सीआरपीएफ पर है.”

देश के विभाजन के समय सीआरपीएफ के योगदान की प्रशंसा करते हुए एनएसए ने कहा कि शायद लोगों को अब यह याद नहीं है कि बंटवारे के समय इस बल की बहुत कम संख्या थी और सीआरपीएफ ने उस समय जो भूमिका निभायी उस पर पुस्तकें लिखी जा सकती हैं. देश के इस विशाल सुरक्षा बल की शुरुआत महज दो बटालियन से हुई थी और आज यह बढ़कर 242 पर पहुंच गई है. यह एकमात्र ऐसा सुरक्षा बल है जो देश के हर कोने में चुनाव, कानून और व्यवस्था के लिए पहुंचा होता है. इस बल की विश्वसनीयता बेमिसाल है.

0 views

©Newziya 2019, New Delhi.