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क्या भारत युद्ध के लिए तैयार है?

Updated: Apr 5, 2019

आनन्द श्रीवास्तव न्यूज़िया ने एक पोल के माध्यम से जनता की राय जाननी चाही कि पाकिस्तान को जवाब देने के लिए कौन सा तरीका सही रहेगा? 1: सर्जिकल स्ट्राइक या 2: युद्ध तो इसमें 70% लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को #युद्ध से जवाब देना चाहिए.


सांकेतिक तस्वीर

लेकिन यह युद्ध दो पड़ोसियों की हाथापाई नहीं है कि जब मन किया लड़ लिए. युद्ध के लिए पूरी तैयारी चाहिए होती है. युद्ध में शामिल देशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है.विकास ठहर जाता है.

तो आइए जानते हैं कि भारत युद्ध के लिए कितना तैयार है?

पिछले साल जुलाई में Comptroller and Auditor General (CAG) यानी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की. जिसमें भारतीय सेना में लगातार गोला बारूद की हो रही कमी के बारे बताया गया था. कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारतीय सेना के पास युद्ध के लिए आवश्यक गोला बारूद के भण्डार में भारी कमी है. युद्ध के लिए आवश्यक गोला बारूद के भण्डार को War Wastage Reserve यानी युद्ध व्यय भण्डार कहते है. इस भण्डार की आवश्यकता तब होती है जब देश को युद्ध लड़ना हो. WWR में कम से कम 40 दिनों तक युद्ध के लिए पर्याप्त गोला बारूद का भण्डारण किया जाता है. इस समय WWR में टैंक और तोप के लिए जो गोला बारूद मौजूद हैं, उसकी स्थिति बहुत बेकार है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपलब्ध गोला बारूद का 55% Minimum Acceptable Risk Level (MARL) यानी न्यूनतम स्वीकार्य जोख़िम स्तर से कम है. MARL किसी भी आकस्मिक संघर्ष की परिस्थिति में कम से कम 20 दिनों तक युद्ध करने के लिए गोला बारूद की आवश्यक मात्रा है. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारतीय सेना के पास मौजूद गोला बारूद का 40% नाज़ुक स्थिति में है. सेना के पास जितना गोला बारूद मौजूद है उससे दस दिन तक भी युद्ध नहीं लड़ा जा सकता है. इसका मतलब यही है कि भारतीय सेना के पास 10-15 दिन तक का छोटा युद्ध लड़ने के लिए भी पर्याप्त आयुध भण्डार नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया है कि “हमने सितंबर 2016 तक गोला-बारूद की उपलब्धता में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा। कुल 152 प्रकार के गोला-बारूद में से 121 प्रकार के गोला-बारूद का स्टॉक (80 प्रतिशत) 40 दिनों के युद्ध के लिए आवश्यक स्तर से कम था."


सांकेतिक तस्वीर

कैग की रिपोर्ट के अनुसार टैंकों और तोपों के लिए उपलब्ध उच्च क्षमता के गोला बारूद भी दयनीय स्थिति में हैं. गोला बारूद की भारी कमी और उनकी ख़राब गुणवत्ता की स्थिति में भारतीय सेना का एक साथ दो देशों से युद्ध लड़ पाना बेहद मुश्क़िल हो जाएगा. जनवरी 2018 में सेना के 'गोला बारूद प्रबंधन' की जांच के दौरान यह कमियां सामने आई हैं. यह जांच अप्रैल 2013 से सितंबर 2016 तक की अवधि के दौरान की गई है. इस परीक्षण से पहले कैग ने 2008 से 2013 के बीच की अवधि में गोला बारूद का 'प्रदर्शन परीक्षण' (performance audit) किया था. इस प्रदर्शन परीक्षण के 'अनुकरण परीक्षण' (follow up audit) के अनुसार मार्च 2013 के 10% की तुलना में सितंबर 2016 तक केवल 20% ही War Wastage Reserve यानी युद्ध व्यय भण्डार की आवश्यकता पूरी हो पायी थी. इस संबंध में कैग की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भले ही WWR के भण्डार में उन्नति हुई है लेकिन गोला बारूद का वर्गवार सूक्ष्म परीक्षण करने पर यह पता चलता है कि WWR के भण्डार में मुख्य रूप से विध्वंसक एवं विस्फोटक आयुध में ही वृद्धि हुई है लेकिन टैंक और तोप के लिए आवश्यक उच्च क्षमता के उन गोला बारूदों की अभी भी काफी कमी है जो दुश्मनों को भारी नुक़सान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं.

फ़्यूज़ की कमी: रिपोर्ट में यह कहा गया है कि सेना के पास फ़्यूज़ की भारी कमी है. आसानी से आप इसे ऐसे समझिए कि यह वही फ़्यूज़ कंडक्टर है जिसे तिरंगा फ़िल्म में ब्रिग्रेडियर सूर्यदेव सिंह ने गैंडा स्वामी की मिसाइलों से निकाल लिया था. यह फ़्यूज़ एक प्रकार से तोप या मिसाइल का दिमाग़ होता है. जो इन्हें दागने से ठीक पहले इनकी शेल में लगाया जाता है. सेना के पास उच्च क्षमता वाले जो 83% गोला बारूद हैं. फ़्यूज़ के बग़ैर उनका प्रयोग युद्ध में नहीं किया जा सकता है.

लक्ष्य प्राप्ति की रफ़्तार बहुत धीमी:

जुलाई 2013 में केन्द्र सरकार ने दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा था कि सेना में Minimum Acceptable Risk Level (MARL) यानी न्यूनतम स्वीकार्य जोख़िम स्तर के अनुसार आयुध भण्डार मार्च 2015 तक 50% किया जाए. लेकिन लक्ष्य प्राप्ति की रफ़्तार इतनी धीमी है कि जो टारगेट मार्च 2015 तक प्राप्त करना था अब उसके मार्च 2019 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. जबकि कैग ने रिपोर्ट में कहा कि मंत्रालय द्वारा 2013 में ही दिशानिर्देश जारी करने के बाद भी हमने आयुध भण्डारण के प्रस्तावित लक्ष्य प्राप्ति का एक भी मामला नहीं देखा.


युद्ध की सांकेतिक तस्वीर

एक तरफ़ कैग की एक साल पुरानी रिपोर्ट कह रही है कि सेना के पास युद्ध के लिए पर्याप्त गोला बारूद नहीं है, दूसरी तरफ़ सरकार यह दावा करती है कि उसने रक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है. भारत का रक्षा बजट साल 2019-20 के लिए 3 लाख करोड़ से ज़्यादा तो रहा लेकिन यह अब भी बहुत कम है. प्रस्तावित बजट 3 लाख 18 हजार 931 करोड़ है. जिसमें OROP, पेंशन आदि भी है. OROP के लिए 35 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए है. यदि इसे कुल बजट में से घटा दिया जाए तो कुल रक्षा बजट 2 लाख 78 हजार 420 करोड़ आता है. अभी भी भारत का रक्षा बजट मंहगाई और रुपए की कमज़ोरी को देखते हुए पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है. भारत अभी अपने कुल GDP का 1.5% हिस्सा रक्षा पर ख़र्च कर रहा है. जो कि भारत के पड़ोसी चीन (2.1%) और पाकिस्तान (2.36%) के मुकाबले बहुत कम है. कुल रक्षा बजट का 85% हिस्सा मानव संसाधन पर ख़र्च करता है, जिसमें जवानों की आय और पेंशन प्रमुख हैं. यही कारण है कि हम नई तकनीकि ख़रीदने में काफ़ी पीछे हैं. रक्षा बजट का बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ़ जवानों की सैलरी में ख़र्च हो जाता है. इसलिए यदि सेना को नई तकनीकि ख़रीदने और आयुध भण्डार को युद्ध स्तर का बनाने के लिए रक्षा बजट को बढ़ाने की आवश्यकता है.

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