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फेसबुक : सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के ‘हाँथी’ के खाने के दांत अलग, दिखाने के दांत अलग

अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में फेसबुक की शीर्ष अधिकारी ने भाजपा विधायक टी. राजा सिंह की पोस्ट पर फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को लागू किए जाने का विरोध किया क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कंपनी के भाजपा के साथ संबंध बिगड़ सकते हैं.

Report- Govind Pratap Singh




अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि, भारत में फेसबुक के एक आला अधिकारी ने भाजपा के कम से कम एक नेता पर इस सोशल मीडिया मंच के हेट स्पीच के लिए निर्धारित नियम लगाने का विरोध किया था.



फेसबुक पोस्ट और सार्वजनिक मंचों पर, भारतीय राजनेता टी. राजा सिंह ने कई बार रोहिंग्या मुस्लिम प्रवासियों व मस्जिदों पर ऐसी टिप्पणियाँ की हैं, जो कि समाज के वर्ग में बुरा प्रभाव डाल सकती हैं. इसके बावजूद इसका बचाव किया जाता रहा.

टी. राजा सिंह तेलंगाना विधानसभा में भाजपा के एकमात्र विधायक हैं और वह अपने सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बयानों के लिए जाने जाते हैं.

Image : Raja Singh

इस साल के मार्च तक, फेसबुक ने निष्कर्ष निकाला कि टी. राजा सिंह ने न केवल कंपनी के घृणास्पद भाषण नियमों का उल्लंघन किया था, बल्कि वह खतरनाक भी है. वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों के अनुसार, ‘सांप्रदायिक हिंसा के भारत के इतिहास और हाल के धार्मिक तनावों को देखते हुए, उन्होंने तर्क दिया, उनकी बयानबाजी वास्तविकता में विश्व हिंसा को जन्म दे सकती है, और उन्हें पूर्ण रूप से कंपनी के सभी प्लेटफार्मों से विश्वव्यापी रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, जैसा कि अमेरिका में रेडियो होस्ट एलेक्स जोन्स, नेशन ऑफ इस्लाम के नेता लुई फरखान और कई श्वेत वर्चस्ववादी संगठनों के लिए किया गया था.’


फिर भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी के सदस्य राजा सिंह अभी भी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय हैं, जहां उनके हज़ारों फॉलोवर हैं.


इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में फेसबुक की एक शीर्ष अधिकारी ने भाजपा के एक नेता और अन्य ‘हिंदू राष्ट्रवादी लोगों और समूहों’ की नफरत भरी पोस्ट को लेकर उन पर फेसबुक के हेट स्पीच नियम लगाए जाने का विरोध किया था. इन लोगों और समूहों की ओर से फेसबुक पर पोस्ट किए गए कंटेट को आंतरिक रूप से ‘पूरी तरह से हिंसा को बढ़ावा देने वाला’ माना गया, इसके बावजूद इसका बचाव किया जाता रहा.




अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में फेसबुक के कुछ पूर्व और कुछ वर्तमान कर्मचारियों के हवाले से कहा गया है कि भारत में फेसबुक की दक्षिण और मध्य एशिया प्रभार की पॉलिसी निदेशक अंखी दास, जिनके कामों में फेसबुक की ओर से भारत सरकार के साथ लॉबीइंग करना भी शामिल है, ने स्टाफ से कहा कि “भाजपा नेता टी. राजा सिंह के खिलाफ फेसबुक के हेट स्पीच नियमों को लागू करने का विरोध किया था क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कंपनी के संबंध भाजपा से बिगड़ सकते हैं और वैश्विक बाज़ार में फेसबुक के उपयोगकर्ताओं की संख्या को नुकसान हो सकता है.”


रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘फेसबुक के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि सिंह के पक्ष में आंखी दास का हस्तक्षेप किया जाना मोदी की पार्टी भाजपा और हिंदू राष्ट्रवादियों के प्रति फेसबुक द्वारा पक्षपात किए जाने के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है.


वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि ‘फेसबुक के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि टी. राजा सिंह के पक्ष में अंखी दास का हस्तक्षेप किया जाना भाजपा और हिंदू राष्ट्रवादियों के प्रति फेसबुक द्वारा पक्षपात किए जाने के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है.’


फेसबुक के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि, फेसबुक अभी भी विचार कर रहा है कि क्या टी.राजा सिंह पर प्रतिबंध लगाए जाएं या नहीं! वहीं आंखी दास ने टी. राजा सिंह को ‘खतरनाक’ शख्स के रूप में चिह्नित करने पर राजनीतिक संबंधों को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन उनका विरोध करना वह एकमात्र कारक नहीं था, जिससे यह निर्धारित किया जाए कि क्या भाजपा के नेता को फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर रहने दिया जाए या नहीं.


वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, विश्वव्यापी महामारी कोरोनावायरस का प्रकोप भारत में भी बढ़ने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पोस्ट्स में ‘मुस्लिमों पर जानबूझकर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया था, वहीं पहले भी कई मामलों में इन नेताओं द्वारा फेसबुक पोस्ट्स में सामाजिक द्वेष फैलाने जैसी बातें लिखने के बाद भी अंखी दास की टीम ने कोई कार्रवाई नहीं की थी.


क्या फ़ेसबुक ने चुनावों में भी मदद की?



वॉल स्ट्रीट जर्नल में कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दास ने चुनाव से संबंधित मुद्दों को लेकर अनुकूल प्रचार करने को लेकर भाजपा की मदद भी की थी. रिपोर्ट में कहा गया, ‘पिछले साल भारत में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से पहले फेसबुक ने ऐलान किया था कि उसने पाकिस्तान की सेना और भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी कांग्रेस के अप्रमाणिक फेसबुक पेजों को हटा दिया है. इसके साथ ही दास के हस्तक्षेप की वजह से भाजपा से जुड़ी झूठी खबरों वाले पेजों को भी हटा दिया गया था.’


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राजा सिंह और भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े की कई फेसबुक पोस्टों को फेसबुक ने तब तक नहीं हटाया, जब तक वॉल स्ट्रीट जर्नल के संवाददाताओं ने इनके बारे में इशारा नहीं किया. ये तमाम पोस्ट मुस्लिमों के प्रति घृणा से भरी हुई थीं. रिपोर्ट में कहा गया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल के हस्तक्षेप के बाद फेसबुक ने सिंह की कुछ पोस्ट डिलीट की हैं.


मीडिया रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘ट्विटर ने इसी तरह की मुस्लिम विरोधी पोस्ट को लेकर अनंत कुमार हेगड़े का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड कर दिया है जबकि फेसबुक ने तब तक इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया, जब तक वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कंपनी से हेगड़े की ‘कोरोना जेहाद’ पोस्ट को लेकर उनसे जवाब नहीं मांगा.’


इससे कुछ महीने पहले, भाजपा के कपिल मिश्रा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें भारतीय संसद द्वारा पिछले दिसंबर में पारित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए राजधानी नई दिल्ली में पुलिस को चेतावनी देते हुए देखा जा सकता है. मिश्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के कुछ ही घंटों बाद, नई दिल्ली में धार्मिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें 53 लोग मारे गए थे.


वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में तीन दिन तक चले दंगे भी फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप के माध्यम से आयोजित किये गये थे, पुलिस द्वारा दायर किए गए अदालती दस्तावेजों के अनुसार और भारतीय समाचार पत्रों में इसे प्रकाशित किया गया था.


रिपोर्ट में कहा गया है कि फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग ने जून में एक कर्मचारी टाउन हॉल मीटिंग में मिश्रा के पद का हवाला देते हुए, उनका नाम लिए बगैर, इस तरह के व्यवहार का उदाहरण दिया था, जो कि प्लेटफ़ॉर्म, एक राजनेता से सहन नहीं करेगा. हालांकि इस वीडियो को बाद में कम्पनी द्वारा हटा दिया गया था.

वहीं फेसबुक ने नीति के तहत फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों को "हेट क्राइम" के रूप में चिह्नित किया था.


रिपोर्ट के अनुसार, जब द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने फेसबुक से इस बारे में पूछताछ की तो फेसबुक ने सिंह की कुछ पोस्ट को डिलीट कर दिया है. वहीं जब द इंडियन एक्सप्रेस ने भाजपा विधायक टी.राजा सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि वह खुद कुछ पोस्ट नहीं करते हैं और जिस कंटेंट की बात कही जा रही है, वह पेज पहले ही बंद कर दिया गया है. राजा सिंह के अनुसार, फेसबुक ने जब हमारा आधिकारिक पेज साल 2018 में बंद किया था तो हमसे कोई बातचीत नहीं की थी.


अब पूरे देश में मेरे कई समर्थक मेरे नाम से पेज बनाकर चलाते हैं. हम उन्हें नहीं रोक सकते. हमारा उन पर नियंत्रण नहीं है. वहीं फेसबुक के प्रवक्ता ने द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बताया कि हम हेट स्पीच और ऐसे कंटेट को प्रतिबंधित करते हैं, जो हिंसा फैलाता है. हमने वैश्विक तौर पर बिना किसी राजनैतिक स्थिति का ख्याल रखे यह नीतियां लागू की हैं. हालांकि हम जानते हैं कि अभी और बहुत कुछ किया जाना बाकी है. हम ऐसी प्रक्रिया बना रहे हैं, जहां निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लगातार ऑडिट कराने पर विचार कर रहे हैं.


Posted By- Vishwajeet Maurya

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