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नहीं रहे छत्तीसगढ़ के सपनों के सौदागर "अजित जोगी"

समीर गोस्वामी

1996 में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे अजित जोगी

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी ने आज दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर अंतिम सांस ली। 74 वर्षीय जोगी 9 मई से कोमा में थे। उन्हें 20 दिन में तीसरी बार दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी।

एक गरीब के घर में पैदा हुआ एक आम छत्तीसगढ़िया, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडलिस्ट, इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर, आईपीएस, आईएएस, राज्यसभा सांसद, लोकसभा सांसद, विधायक, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री, अपनी ज़िंदगी में जोगी जी ने जिन चीज़ों में हाथ लगाया उसमें शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। अपने निजी एवं राजनीतिक जीवन में एक अजेय योद्धा के रूप में उन्होंने महारत हासिल की थी।


छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजित जोगी


तभी राजीव गांधी सरीखे नेता को अजित जोगी की काबिलियत की पहचान प्रथम मुलाकात में हो गई थी। राजीव जी को तत्कालीन मध्यप्रदेश राज्य में एक बोल्ड आदिवासी नेता की ज़रूरत थी और उनकी ज़रूरत को उस समय के इंदौर के कलेक्टर अजित जोगी ने पूरी की।


राजीव गांधी के साथ अजित जोगी


अजित जोगी की शख़्सियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी जी संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भारत की तरफ से मुख्य वक्ता बनकर गए थे, तब उनके प्रतिनिधिमंडल में केवल दो सदस्य और थे, शरद पवार और अजित जोगी।


अपनी गुरतुर छत्तीसगढ़ी भाखा से आम लोगों का दिल जीतने वाले जोगी पूरे भारत में छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान के एक मुख्य कारण थे, क्योंकि जोगी ने देश के दूसरे राज्यों में भी राजनीतिक सूझबूझ से अपनी पैठ बनाई थी।


मुझे 2009 लोकसभा चुनाव का एक वाकया याद आ रहा है जब जोगी जी की धर्मपत्नी रेणु जोगी ने बिलासपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। तब अजित जोगी हमारे गांव - सरगांव चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। तब उन्होंने यहां की जनता से एक बात कही कि "ए दारी के चुनई म कोन खड़ा होए हे जानथव।" जोगी ने कहा "ए दारी मोर सुवारी हा चुनई म खड़ा होए हे अउ ओही ला जिताना हे।" तब यहां की जनता जोगी के उस छत्तीसगढ़ी भाषण से बहुत खुश हुई थी। हालांकि रेणु जोगी बहुत कम मतों के अंतर से यह चुनाव हार गई।


अपने राजनीतिक रसूख से कभी समझौता नहीं करने वाले जोगी ने 2015 में अपनी मातृ पार्टी कांग्रेस से अलग होकर "जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़" नाम से नई पार्टी का गठन किया। इस पार्टी ने जोगी के नेतृत्व में 2018 के विधानसभा चुनाव में 5 सीटें भी हासिल की।


आम लोगों से आसानी से जुड़ने की कला में जोगी जी इतने माहिर थे कि वे जब भी किसी चुनावी रैली या सभा में जाते थे तो भूपेश बघेल और रमन सिंह के सभा से ज्यादा भीड़ इनकी सभा में आती थी। तभी उनको छत्तीसगढ़ का बघवा नेता कहा जाता है, क्योंकि वो एक आम छत्तीसगढ़िया की बात करते थे। यकीनन उनके जाने से राज्य ने एक पितामह को खो दिया है। जिस प्रकार बाल ठाकरे के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक खालीपन है ठीक वैसे ही अजित जोगी के जाने से छत्तीसगढ़ में एक खालीपन आ गया है और इसकी भरपाई करना नामुमकिन है।


सोशल मीडिया में तैरने वाली अजित जोगी की अंतिम तस्वीर, जिसमें अमित जोगी अपने पिता के पैर छू रहे हैं


हालांकि जोगी जी अपने जीवन में बहुत सारे संगीन विवादों से घिरे रहे। वे कहते थे कि "हाँ मैं सपनों का सौदागर हूँ, मैं सपने बेचता हूँ।" लेकिन एक आम छत्तीसगढ़िया को इनके निजी जीवन की सफलता से सीख लेनी चाहिए। छत्तीसगढ़ ने अपने एक अमूल्य नेता को खो दिया है।


आपको विनम्र श्रद्धांजलि जोगी जी💐💐💐🙏🙏  #AjitJogi# #chhatisgarh #CM

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