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हमारे वैज्ञानिकों ने एक कदम और बढ़ाया सफलता की ओर

Updated: Feb 14, 2019

बुधवार 6 फरवरी को देश का नवीनतम उपग्रह जीसैट-31 फ्रेंच गुयाना से एक यूरोपीय रॉकेट द्वारा सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में सस्थापित किया गया। भारतीय समयानुसार देर रात 2 बजकर 31 मिनट पर दक्षिण अमेरिका के उत्तर पूर्व तटीय क्षेत्र में स्थित फ्रांसीसी क्षेत्र कौरू के एरियन लांच काम्प्लेक्स से प्रक्षेपण किया गया। उड़ान करीब 42 मिनट की थी।


आधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-31 का प्रेक्षण

न्यूज़िया के ज़रिये जानिए इसके फ़ायदे:

  1. इस मिशन से एटीएम नेटवर्क की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और डीटीएच सेवा भी मजबूत होगी।

  2. यह इसरो के पहले के इनसैट/जीसैट उपग्रह श्रृंखला का उन्नत रूप है। यह भारतीय मुख्य भूभाग और द्वीपों को संचार सेवाएं मुहैया कराएगा।

  3. जीसैट-31 देश का 40वां संचार उपग्रह है।यह भूस्थैतिक कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोन्डर क्षमता को बढ़ाएगा।

  4. इसका इस्तेमाल वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक, डिजिटल उपग्रह समाचार संग्रह, डीटीएच-टेलीविज़न सेवाओं, सेलुलर बैकहॉल कनेक्टिविटी और ऐसे कई उपकरणों में किया जाएगा।

  5. यह व्यापक बैंड ट्रांसपोन्डर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से में संचार की सुविधाओं के लिए व्यापक बीम कवरेज़ उपलब्ध कराएगा।


इसरो द्वारा यही 40 वां उपग्रह अपनी कक्षा में आज स्थापित

एरियनस्पेस के सीईओ स्टीफन इस्राइल ने ट्वीट किया,‘‘सऊदी के भूस्थैतिक उपग्रह 1 हेलास सैट-4 और जीसैट-31 की उड़ान के साथ एरियनस्पेस की 2019 की अच्छी शुरुआत हुई। इनकी सफलता भूस्थैतिक प्रक्षेपण के क्षेत्र में हमारे नेतृत्व की स्थिति बताती है।

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