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'सुरसा' राक्षसी के मुंह की तरह बढ़ती IIMC की फ़ीस, छात्र आंदोलित

नई दिल्ली/आईआईएमसी: हमें बचपन में पढ़ाया गय था कि भविष्य में किसी देश की समृद्धि का स्तर इस बात से आंका जाएगा कि वहां की शिक्षा का स्तर किस तरह का है. यह बताते हुए हमारे अध्यापक ने उम्मीद भरी आवाज़ में कहा था कि भारत का भविष्य बहुत समृद्ध होगा. इस बात को बीते कई बरस हो चुके हैं और आज देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.


2 दिसबंर से भारतीय जन संचार संस्थान यानी आईआईएमसी (IIMC) के छात्र हर साल सुरसा राक्षसी की मुंह की तरह बढ़ने वाले फीस के ख़िलाफ विरोध पर बैठे हैं. उनकी मांग संस्थान के फीस को कम करने की है. वर्तमान में हिन्दी पत्रकारिता की फ़ीस 95 हज़ार है जो 2014 में 55 हजार हुआ करती थी.


IIMC में आंदोलित छात्र-छात्राएं
  • IIMC में वर्ष 2019-20 के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए फीस संरचना निम्नानुसार है: 1. रेडियो और टीवी पत्रकारिता: 1,68,500 2. विज्ञापन और पीआर: 1,31,500 3. हिंदी पत्रकारिता: 95,500 4. अंग्रेजी पत्रकारिता: 95,500 5. उर्दू पत्रकारिता: 55,500


कुछ दिनों में पहले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र भी फ़ीस बढोत्तरी के ख़िलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे. JNU के छात्रों को प्रदर्शन करते हुए एक महिने से ज़्यादा का वक्त बीत चुका है. उत्तराखंड में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों के छात्र भी बेतहाशा फ़ीस वृद्धि के ख़िलाफ पिछले 48 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि फ़ीस अचानक अस्सी हज़ार से बढ़ाकर 2 लाख प्रति साल कर दिया गया है. हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद इन कॉलेजों की मनमानी इस कदर जारी है.




MHRD ने कुछ दिन पहले सभी IIT’s के एमटेक कोर्स की फीस में भारी बढ़ोत्तरी की थी. साथ ही छात्रों को मिलने वाला स्टाइपेंड बंद कर दिया गया है. जिसके विरोध में IIT BHU के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन भी किया. छात्रों की फीस 20,000 से बढ़ कर 2 लाख करने का फैसला कुछ दिनों पहले ही आया है. यह पुरानी फ़ीस के मुकाबले 900% की बढ़ोत्तरी है.


IIMC में विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में BHU के छात्र

आपको बता दें कि अपनी शिक्षा प्रणाली की बदौलत ही अमरीका ने सेमी कंडक्टर, सूचना तकनीक और बायोटेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में इतनी तरक्की की है. इस सबके पीछे वहां के विश्वविद्यालयों में किए गए शोध का बहुत बड़ा हाथ है. उच्च शिक्षा के अखिल भारतीय सर्वेक्षण-2018 के अनुसार भारत में 907 विश्वविद्यालय और 50,000 उच्च शिक्षा संस्थान हैं. जिनमें 3.3 करोड़ छात्र नामांकित हैं. संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो भारत की उच्चतर शिक्षा व्यवस्था अमरीका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर आती है, लेकिन जहां तक गुणवत्ता की बात है. दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है.


- रजत कुमार की रिपोर्ट


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