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India-China Border Tension: गैलवान घाटी में संघर्ष

पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर कल चीन-भारतीय सेना के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गये।


-Govind Pratap Singh


अक्टूबर 1975 में चीनी सीमा प्रहरियों द्वारा असम राइफल्स के चार जवानों की हत्या कर दी गई थी और उसके बाद से इस 3,488 किलोमीटर की सीमा पर यह पहला घातक संघर्ष है।


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मंगलवार को सुबह एक बयान में, सेना ने कहा: "गैलवान घाटी में डे-एस्केलेशन प्रक्रिया के दौरान, दोनों पक्षों के हताहतों के साथ कल (सोमवार) रात एक हिंसक सामना हुआ। भारतीय पक्ष पर जानमाल के नुकसान में एक अधिकारी और दो सैनिक शामिल हैं। दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी वर्तमान में स्थिति को परिभाषित करने के लिए बैठक कर रहे हैं। ”


मंगलवार की देर शाम, सेना के एक अन्य बयान में कहा गया है: "17 भारतीय सैनिक जो स्टैंड-ऑफ पर ड्यूटी की लाइन में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वे ऊंचाई वाले व कम तापमान के इलाकों के संपर्क में थे, उन्होंने चोटों के कारण दम तोड़ दिया।"

जारी बयान में यह भी कहा गया है: "गैलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिक 15/16 जून 2020 की रात को भिड़ गए थे।" 


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एक तरफ अपुष्ट खबरें यह भी थीं कि संघर्ष में पांच पीएलए सैनिक भी मारे गए थे। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों ने चीनी क्रूरता का वर्णन करते हुए कहा कि कुछ भारतीय सैनिकों के शव को चट्टानों से तो कुछ को नदी से बरामद किया गया।


सूत्रों ने अनुसार पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 (पीपी 14) के आसपास के क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के भारतीय हिस्से में झड़प हुई, जब पीएलए के लगभग 300 सैनिकों ने लगभग 50 भारतीय सैनिकों के एक समूह पर हमला किया। हालांकि सेना के सूत्रों ने यह कहा है कि घटनास्थल पर फायरिंग नहीं हुई है, बल्कि इस हिंसक झड़प में पत्थर, ऑयरन रॉड्स का इस्तेमाल हुआ है।


उधर बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने झड़प के लिए भारतीय सैनिकों को दोषी ठहराया है, उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैनिकों ने सोमवार को दो बार अवैध रूप से सीमा पार की थी और चीनी सैनिकों पर हमला किया था। उन्होंने यह भी कहा है हम अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं" लेकिन तनाव को हल करने की दिशा में काम करेंगे।


इस बीच, वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने कहा कि चीनी सैनिकों ने पिछले महीने भारतीय दावेदारी और गश्त वाले इलाके में घुसपैठ की थी।


पैंगोंग त्सो एरिया में फिंगर -4 के पास, जहां चीनी सैनिक बड़ी संख्या में डटे हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यहां पर चीन ने भारत की पेट्रोलिंग आगे जाने से ब्लॉक भी कर दी है। 


भारत के सैनिक पहले फिंगर-8 तक पट्रोलिंग के लिए जाते रहे हैं। पर अभी फिंगर -4 के पास ब्लॉक कर दिया है। गलवान वैली और हॉट स्प्रिंग एरिया में तीन जगहों पर गतिरोध है। पीपी (पट्रोलिंग पॉइंट)-14, पीपी-15 और पीपी-17। पैंगोंग त्सो एरिया में फिंगर-4 के पास चीनी सैनिक भारी तादाद में डटे हैं और यहां टेन्ट के साथ ही तोपें और भारी वाहन भी बड़ी संख्या में हैं। यहां चीनी सैनिक भारत के इलाके में हैं और फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं है। भारत का दावा है कि एलएसी फिंगर-8 से गुजरती है। चीन ने फिंगर-4 तक पक्की सड़क भी बना ली है।


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रिपोर्टें यह भी सामने आ रही हैं कि चीनी सैनिकों ने दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में गैलवानन के उत्तर में स्थित डेपसांग क्षेत्र में प्रवेश किया है। यहां उन्होंने कथित तौर पर पीपी 12 और पीपी 13 तक के क्षेत्रों को सुरक्षित कर लिया है। डेपसांग वही सेक्टर है जहां भारत और चीन ने 2013 में तनाव देखा था।


वर्तमान संकट अप्रैल के अंत में शुरू हुआ जब भारतीय खुफिया एजेंसी ने एलएसी के पार चीनी टुकड़ी की  बिल्डअप की सूचना दी। हालांकि, भारतीय सेना ने कोविड -19 महामारी के कारण प्रतिवाद करने वाले बल की तैनाती नहीं की थी।


नतीजतन, सेना को अचंभा तब हुआ जब अप्रैल के अंत में एक बड़ी चीनी सेना ने गैलवान और पैंगोंग-त्सो क्षेत्रों में एलएसी पार कर लिया।


सूत्रों के अनुसार, इस बार पीएलए के सैनिक घुसपैठ करने के लिए गड्ढे़ खोद रहे हैं, बंकर तैयार कर रहे हैं और पीछे की तरफ से तोपें तैनात कर रहे हैं। 


सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि आमने-सामने आने का एक कारण यह है कि भारत कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और चीन के बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ अंतर को कम करने के लिए सड़कों और हवाई क्षेत्रों का निर्माण कर रहा है।


गैलवान में, भारत ने पिछले अक्टूबर में एक हवाई क्षेत्र की ओर जाने वाली एक सड़क के निर्माण को पूरा किया है। वहीं चीन ने भारत से सभी निर्माण रोकने को कहा है। हालांकि भारत ने यह कह कर स्षष्ट कर दिया है कि "हम अपने क्षेत्र में किसी भी गतिविधि या निर्माण कार्य को करने के लिए स्वछंद है।"


अलग-अलग पीएलए ब्रिगेड और डिवीजनों की ज़िम्मेदारी के क्षेत्र सहित 2,000 किमी की सीमा तक फैले लद्दाख में पीएलए की घुसपैठ एक स्थानीयकृत घटना प्रतीत नहीं होती है। यह उच्च सैन्य और राजनीतिक स्तरों पर केंद्रीकृत समन्वय का सुझाव नजर आता है।



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