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सामाजिक एकता का पर्याय बनता अंतर्जातीय विवाह

Updated: Apr 5, 2019

आनन्द श्रीवास्तव

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2014 में हुए एक शोध के मुताबिक़ भारत में 5% लोग अंतर्जातीय विवाह करते हैं। अंतर्जातीय विवाह को समाज में मौजूद असमानता को दूर करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों ने अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की थी। जिसमें अपनी जाति से नीचे की जाति में विवाह करने पर 2.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की जाती है।


नेशनल काउंसिल ऑफ़ एप्लाइड इकोनोमिक रीसर्च के शोध में यह पता चला है कि भारत में सर्वाधिक अंतर्जातीय विवाह मिजोरम में होते हैं। मिजोरम में लगभग 55% शादियां अंतर्जातीय होती हैं।

जबकी पूरे भारत में 95% विवाह समान जाति में होते हैं। लेकिन 87% ईसाई आबादी वाला मिजोरम इस मामले में अपवाद है।

मिजोरम के बाद सबसे ज़्यादा अंतर्जातीय विवाह (46%) मेघालय में होता है फिर (38%) सिक्किम में होता है।


अगर हम बात करें अपनी ही जाति में विवाह करने की तो इस मामले में 99% के साथ मध्यप्रदेश सबसे आगे है। जहां ज़्यादातर लोग अपनी ही जाति में विवाह करते हैं।


क़ानूनी रूप से भारतीय अंतर्जातीय विवाह कर सकते हैं। इसके लिए 50 वर्ष पुराना क़ानून है। लेकिन अक्सर अंतर्जातीय विवाह करने पर लड़का लड़की को अपने ही परिवार से ख़तरा होता है। कभी कभी यह ख़तरा इतना बढ़ जाता है कि नवविवाहितों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है।

2016 में सम्मान के नाम पर हत्या यानी 'ऑनर किलिंग' के 71 मामले, 2015 में 251 और 2014 में 28 मामले दर्ज़ हुए थे। 'ऑनर किलिंग' के मामले अक़्सर दर्ज़ नहीं किए जाते जिस वज़ह से आंकड़ों के बग़ैर सही आंकलन करना मुश्किल है।


'ऑनर किलिंग' के मामले इस हद तक बढ़ गए कि सर्वोच्च न्यायालय को दख़ल देना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2018 में दो वयस्कों के बीच मर्ज़ी से होनेवाली शादी में खाप पंचायतों के दख़ल को ग़ैर-क़ानूनी क़रार दे दिया। कोर्ट का कहना था कि परिवार, समुदाय और समाज की मर्ज़ी से ज़्यादा ज़रूरी है, शादी के लिए लड़का और लड़की की रज़ामंदी। खाप पंचायतों और परिवारों से सुरक्षा के लिए कोर्ट ने राज्य सरकारों को 'सेफ़ हाउस' बनाने की सलाह भी दी। क़रीब छह महीने बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर कोर्ट के दिशा-निर्दश लागू करने को कहा भी, लेकिन कुछ ही राज्यों ने अब तक 'सेफ़ हाउस' बनाए हैं।


लेकिन आवश्यकता है पूरे भारत को सेफ़ हाउस बनाने की।

जिससे अंतर्जातीय विवाह के अनुकूल माहौल बन सके।

समाज में व्याप्त असमानता दूर हो सके। अंतर्जातीय विवाह करने वाले रविन्द्र और शिल्पा का मानना है कि धीरे धीरे ऐसा समय आएगा कि अंतर्जातीय विवाह टैबू नहीं माना जाएगा। लोग इसे लेकर सहज हो जाएंगे।

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