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20 मिसाइल्‍स लेकर पूरी दुनिया में कहीं भी हमला कर सकता है B-52 बॉम्‍बर, जानें क्‍यों है खास

ईरान के साथ तनाव को देखते हुए अमेरिका ने 6 बोइंग B-52 स्ट्रेटोफोट्रेस हिंद महासागर में तैनात किए हैं. डिएगो गार्सिया आईलैंड में तैनात B-52 अमेरिका का लांग रेंज, सबसोनिक, जेट-संचालित स्ट्रेटेजिक बॉम्बर है. आवाज की गति से भी तेज चलने वाले अमेरिका की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोइंग B-52 को हमेशा रणनीति में अहम जगह दी जाती है. अमेरिका की एयरफोर्स B-52 का साल 1950 से इस्तेमाल कर रही है. B-52 का निर्माण अमेरिकन एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने किया था.

क्‍यों है खास?

B-52 बॉम्‍बर 14,080 किलोमीटर की रेंज तक अटैक कर सकता है. यानी इसके जरिए अमेरिका दुनिया के किसी भी हिस्‍से पर बम बरसा सकता है. B-52 बॉम्‍बर के जरिए परमाणु हथियार भी गिराए जा सकते हैं. ये बॉम्बर 32000 किग्रा तक हथियार ले जाने में सक्षम है. B-52 में एक साथ 5 लोग - एयरक्राफ्ट कमांडर, पायलट, रडार नेवीगेटर और इलेक्ट्रोनिक वारफेयर ऑफिसर सवार हो सकते हैं.' B-52 के पायलट खास तरह का नाइट विजन गॉगल पहनते हैं. यह पायलट्स को दुश्‍मन के रडार एरिया का अंदाजा देता है जिससे वह उससे बचते हुए अपना एयरक्राफ्ट निकाल लेते हैं. B-52 के एडवांस्ड टारगेटिंग पॉड्स से सटीक निशाने पर मिसाइल दागी जा सकती है. B-52 एक साथ 20 क्रूज मिसाइल ले जा सकता है. B-52 में 50000 फीट तक उंचाई पर भी भारी भरकम हथियार ले जाने की क्षमता के साथ साथ दूर तक मार करने की क्षमता भी है.

बीच-बीच में बोइंग B-52 के रिटायर होने की अटकलें लगती हैं.