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जमात-ए-इस्लामी पर केंद्र सरकार का Surgical Strike


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कश्मीर में बड़े स्तर पर टेरर फंडिंग करने वाले जमात-ए-इस्लामी पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद बड़े पैमाने पर करवाई शुरू हो गई है जिसके बाद जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया है साथ ही UAPA प्रापर्टी और प्रोविजन के तहत J&K में उसकी जुटाई गई लगभग 52 करोड़ रूपयों से ज्यादा की संपत्ति सील की गई तथा 70 से अधिक परिसरों की पहचान की गई है। जिसमें कई स्कूल और दफ्तर भी शामिल है।


आपको बता दे कि हॉल ही में गृह मंत्रालय के सूत्रों से पता चला कि जमात-ए-इस्लामी हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को बड़े स्तर पर फंड मुहैया कराता था ऐसे इनपुट के बाद गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया।

सूत्रों की माने तो इस मामले में अब अगला नम्बर हुर्रियत का हो सकता है।


दरअसल आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन को जमात-ए-इस्लामी ने ही J&K में खड़ा किया है। इस संगठन ने हिजबुल की हर तरह से सहायता की है।

जमात-ए-इस्लामी J&K का मिलिटेंट विंग है, यह कश्मीर में आतंकवादी मानसिकता और अलगावादी विचारधारा के प्रसार में तथा घाटी में देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यह प्रमुख जिम्मेदार संगठन रहा है।


पाकिस्तान के संरक्षण में पल रहे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को ट्रेंड करना, आने जाने की सुविधा तथा फंड इकट्ठा करने जैसी हर एक सहायता मुहैया कराना इस संगठन का काम रहा है।


ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस एक अलगावादी और उग्रवादी विचारधाराओं का गठबंधन है, जो पाकिस्तान द्वारा प्प्रायोजित आतंकवाद को वैचारिक समर्थन देता है। इन संस्थाओं के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी का बड़ा हाथ रहा है।


आपको बता दें कि वर्ष 1975 में J&K सरकार ने 2 साल के लिए जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था, जबकि वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने 1993 तक के लिए इसे प्रतिबंधित किया था।

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