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आखिर कब टूटेगी जेएनयू प्रशासन की नींद?

शशांक मिश्र

नई प्रवेश परीक्षा प्रणाली को लेकर 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं छात्र

प्रशासनिक भवन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय

देश का सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाला विश्वविद्यालय ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा में है. यह चर्चा टीवी की तीखी बहसों और प्राइम टाइम से दूर है. जेएनयू में देश के हर कोने और तबके से छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. सत्र 2019-20 के लिए आवेदन 15 मार्च से शुरू हो चुके हैं.इस बार प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी एनटीए( नेशनल टेस्ट एजेंसी) को सौंपी गई है. इसी के चलते जेएनयू के कुछ छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका कहना है कि "जेएनयू के वाइस चांसलर ( प्रो.जगदीश कुमार) जेएनयू में तानाशाही कर रहे हैं. यहाँ कुछ भी नियमों के अनुसार नहीं हो रहा है. वीसी की जो मर्जी होती है वो वही करते हैं. यहाँ पर नियमों की अनदेखी की जा रही है. 9 दिन हो गए हैं हड़ताल को लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई हाल तक पूछने नहीं आया नहीं. ना ही संपर्क करने की कोशिश की गई है."


प्रदर्शन करते छात्र

अब यह भी जान लेते हैं कि अनशन पर बैठे इन छात्रों की मांगें क्या हैं? 1- एडमिशन के लिए टेस्ट ऑनलाइन नहीं ऑफलाइन कराया जाए! अमुथा जयदीप, जॉइंट सेक्रेटरी( जेएनयू स्टूडेंट यूनियन) का कहना है कि "ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा की पहुँच भारत के हर कोने में नहीं है. ये सिर्फ़ महानगरों तक ही सीमित है जहाँ कंप्यूटर लैब हैं. इसके चलते दूर-दराज के इलाकों से जेएनयू आने वाले छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा."

2- ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को एंट्रेंस एग्जाम में रियायत दी जाए!

इस मांग पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इतिहास की पढ़ाई कर रहे शशिभूषण का कहना है कि "पहले एडमिशन में जिन छात्रों ने महानगरों में पढ़ाई नहीं की है, जो ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई करने वालें हैं को जेएनयू के एंट्रेंस एग्जाम में 3 से 5 नंबर का ग्रेस दिया जाता था लेकिन इस सत्र में इस नियम को हटा दिया गया है. ये गलत है. इसके चलते ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है. ग्रेस के नंबर दी जाने वाली व्यवस्था की बहाली की जाए."

3- MBA कोर्स की बढ़ाई गई फीस वापस ली जाए!

अमुथा का कहना है कि "इस सत्र में MBA कोर्स की फीस 10 फीसदी तक बढ़ा दी गई. ऐसे में वो छात्र जो आर्थिक रूप से पिछड़े हैं लेकिन जेएनयू में पढ़ने का सपना रखते है वो इस बढ़ी फीस भार कैसे वहन कर पाएंगे?"

4- एम.फिल और पीएचडी में प्रवेश के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा हो! इस मांग पर बात करते हुए अमुथा ने बताया कि "अब एम.फिल के छात्रों को भी पीएचडी में दाखिला लेने के लिए एंट्रेस देना पड़ेगा. जबकि पहले ऐसा नहीं था.पहले एम.फिल और पीएचडी के लिए एक साथ एडमिशन होता था. एम फिल में जो छात्र है वो फाइनल ईयर में अपनी थीसिस लिखेगा या पीएचडी के एंट्रेंस की तैयारी करेगा. ऐसा करने से छात्र पर दोहरा भार पड़ेगा. इसलिए एम.फिल और पीएचडी में प्रवेश के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होनी चाहिए."

5- दाखिले में आरक्षण के नियमों की अनदेखी ना की जाए!

छात्रों का कहना है कि जेएनयू में एडमिशन रिज़र्वेशन के नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है. जो संवैधानिक रूप से ग़लत है. संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था है उसी के आधार पर दाखिला दिया जाए.

6- शोध के क्षेत्रों में सीटें बढ़ायी जाएं!

छात्रों को कहना है कि पिछले कुछ सालों से हर बार शोध में सीटों की कटौती हो रही है. भारत जैसा देश शोध के मामले में वैसे ही पीछे है. ऐसे में अगर जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय में ही शोध की सीटें कम होंगी तो नए विचार कैसे जन्म ले पाएंगे?


VC के आवास पर विरोध प्रदर्शन करते छात्र

"सोमवार की सुबह कुछ छात्रों का समूह वीसी से मिलने उनके आवास पर भी गया था लेकिन वो नहीं मिले. हमारा धरना शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा था लेकिन वीसी साहब ने ट्वीट करके हम पर उनकी पत्नी को डराने और धमकाने के आरोप लगाए हैं. जो बेबुनियाद हैं. वीसी हमें एफआईआर करने की धमकी देकर डराना चाहते हैं लेकिन हम डरेंगे नहीं. ये सिर्फ जेएनयू का ही मुद्दा नहीं है.अभी हाल ही में पांडिचेरी विश्वविद्यालय में भी फीस में बढ़ोतरी की गई थी. वहाँ के छात्र भी इसका विरोध कर रहे हैं. हम अभी कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ संपर्क में हैं. अगर समय रहते हमारी मांगों को नहीं माना गया तो हम सब साथी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर भी उतरेंगे. इस प्रदर्शन में जेएनयू टीचर्स का संगठन भी हमारे साथ है." ये कहना है जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की जॉइंट सेक्रेटरी अमुथा जयदीप का.


आज 9वां दिन है भूख हड़ताल का.हड़ताल पर बैठे कुछ छात्रों की तबीयत भी बिगड़ गई है. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बाकी छात्रों की भी तबीयत गंभीर बताई जा रही है. प्रशासन की तरफ से अभी तक इन छात्रों से कोई संपर्क भी नहीं किया गया है. ना ही वीसी की तरफ से कोई सांत्वना दी गई है. देखना होगा कि आखिर कितने दिन बाद जेएनयू प्रशासन नींद से जागेगा? अब आंदोलनरत छात्र मंडी हाउस से संसद भवन तक एक रैली करने वाले हैं जिससे उनके आंदोलन के बारे में देश को भी पता चले और उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाए।

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