• Vishwajeet Maurya

18 जून 1979: अमरीका-सोवियत संघ के बीच हथियार नियंत्रण समझौता


अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और सोवियत संघ के नेता लीओनिद ब्रेज़नेव के बीच पहली बार हथियारों की तादाद के ऊपर नियंत्रण करने को लेकर ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में समझौता हुआ. स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (साल्ट II) के तहत दोनों मुल्कों ने ये तय किया की दोनों महाशक्तियां अपने मिसाइल लॉन्चरों की तादाद को 2400 की संख्या तक सीमित करेगें.

जान लीजिए क्या है स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (साल्ट) ?

सामरिक अस्त्रों (युद्ध क्षेत्र से जुड़े अस्त्र) के परिसीमन के लिये संयुक्त राज्य अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ के मध्य हुई द्वि-पक्षीय वार्ताओं को सामरिक हथियार परिसीमन वार्ताएं (Strategic Arms Limitation Talks-SALT) के नाम से जाना जाता है। इन वार्ताओं ने दो अभिसमयों (दो से अधिक राष्ट्रों में आपस में राज्यों के लाभ के विषय पर लिया गया उचित समझौता) को जन्म दिया- साल्ट-1 तथा साल्ट-II, साल्ट-I पर मई 1972 में हस्ताक्षर हुए, जबकि साल्ट-II पर 1979 में। दोनों का लक्ष्य परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्द्धा पर रोक लगाना था।

कहानी कुछ ऐसे शुरू होती है कि “साल्ट-I का विकास संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चार वर्ष तक हुई वार्ताओं के आधार पर हुआ। इस समझौते में मोटे तौर पर दो अलग-अलग संधियां सम्मिलित थीं, जिनमे एक थी प्रक्षेपास्त्र विरोधी प्रणाली (Anti-Ballistic Missile) का परिसीमन तो दूसरी थी सामरिक विध्वंसक शस्त्र परिसीमन पर अंतरिम समझौता (Interim Agreement on the Limitation of the Strategic Offensive Arms)।”

बात आती है परिसीमन की तो आसान भाषा में समझिए कि परिसीमन का शाब्दिक अर्थ होता है “सीमा निर्धारित करना” यदि कोई देश घरेलू, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमा निर्धारित करता है तो इस प्रक्रिया को परिसीमन कहा जाता है।

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल (एबीएम) संधि की समय सीमा असीमित थी, जबकि सामरिक शस्त्र परिसीमन अंतरिम समझौता सिर्फ पांच वर्षों के लिये प्रभावशाली था। एबीएम संधि के अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत रूस केवल दो ठिकानों (राष्ट्रीय राजधानी के इर्द-गिर्द और किसी एक आईसीबीएम (अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) ठिकाने पर एबीएम की तैनाती कर सकते थे। इस संधि ने एबीएम प्रणाली की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की। अंतरिम समझौता, जो कि संधि का ही एक भाग था, उसमें भूमि आधारित आईसीबीएम तथा पनडुब्बी-प्रक्षेपित परमाणु प्रक्षेपास्त्र दोनों को सम्मिलित किया गया। सोवियत संघ के लिये आईसीबीएम की अधिकतम संख्या 1,618 निर्धारित की गयी, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये 1,054 ।

साल्ट-1 की प्रक्रिया अक्टूबर 1977 में समाप्त हो गई। फिर भी, दोनों देशों ने संधि के प्रावधानों का पालन करना जारी रखा तथा एक नये समझौते के लिये वार्ताएं शुरू कीं । इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप जून 1979 में विएना में साल्ट-II पर हस्ताक्षर किए गए। इस संधि के अंतर्गत दिसंबर 1985 तक सामरिक अस्त्रों की संख्या सीमित करने का लक्ष्य रखा गया। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट द्वारा समर्थन पाने से पहले ही अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के कारण साल्ट-II संकटग्रस्त हो गई तथा उसका कभी भी अनुमोदन नहीं हो पाया। इस प्रकार साल्ट-II एक अप्रचलित नियम(dead-letter) बनकर रह गई।

इसके तहत दोनों ने ज़मीन से मार का सकने वाले नए अंतर महाद्विपीय बैलिस्टिक मिसायलों की तैनाती बंद कर दी. साथ ही ये भी तय हुआ कि पनडुब्बियों को नई मिसायलों से नहीं लैस किया जाएगा. ये समझौता जब तक अनुमोदन के लिए आता तब तक अमरीका और सोवियत संघ के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था. जनवरी 3 को राष्ट्रपति कार्टर ने खुद अमरीकी संसद से इस समझौते के पर विचार विमर्श रोक देने का आग्रह किया क्योंकि सोवियत संघ की सेनाएँ अफ़गानिस्तान में पहुँच चुकी थीं. हालाँकि ये समझौता अमरीकी संसद से अनुमोदित नहीं हुआ पर कार्टर ने ये ज़रूर कहा कि अगर सोवियत संघ अपने वादे को पूरा करता है तो अमरीका भी अपने वादे निभाएगा.


-Govind Pratap Singh

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