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अवसाद से अभिनेता का अंत

देवेश जायसवाल


जितनी बुरी मौत इस कलाकार को रीयल लाइफ में मिली। शायद उतनी बुरी मौत रील लाइफ में भी न मिली हो। हम बात कर रहे हैं 80-90 के दशक के मशहूर अभिनेता महेश आनंद की। 13 अगस्त 1961 को जन्में महेश अपनी सुडौल कदकाठी के कारण हमेशा भाड़े के शूटर या ख़ूंखार विलेन के किरदार में नज़र आए।

महेश सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ शहंशाह समेत 9 फिल्मों में काम कर चुके थे। इसके साथ ही उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना, जितेंद्र, धमेंद्र और सनी देओल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ काम किया था। उनकी यादगार फिल्मों में शहंशाह, स्वर्ग, खुद्दार, कूली नंबर 1, कुरुक्षेत्र समेत कई मशहूर फ़िल्में हैं।


महेश आनंद साभार : India TV

पिछले कई सालों से काम न मिलने के कारण वह अवसाद में थे। उनके क़रीबी अभिनेता शक्ति कपूर बताते हैं कि महेश शराब के आदी हो गए थे। अक्सर नशे में लोगों को फोन किया करते थे। उन्होंने कई बार महेश को शराब छोड़ने के लिए कहा था।

हाल ही में उन्हें 18 साल बाद पहलाज निहलानी की फ़िल्म "रंगीला राजा" में छह मिनट की भूमिका मिली थी। जिसे लेकर महेश बहुत खुश थे।

महेश आनन्द ने 2000 में एरिका डिसूजा से शादी की थी। जो 2002 में उनसे अलग हो गए थी। एरिका ने बाद में शाहिद वोरा से शादी कर ली थी। एरिका से अलगाव के बाद महेश वर्सोवा में अपने फ्लैट में अकेले ही रह रहे थे। उन्हें शराब की बुरी आदत लग गई थी। महेश पिछले दो दिन से डोर बेल का जवाब नहीं दे रहे थे। जब ये बात उनकी बहन को पता लगी तो वह पुलिस के साथ उनके फ्लैट पहुंची। जहां उनकी 2 दिन पुरानी लाश और साथ में शराब की गिलास पड़ी मिली। महेश 57 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए। उनकी मौत की वज़ह भी शराब की अधिक लत बताई जा रही है। काम न मिलने के कारण महेश रेसलिंग करके अपना गुजारा कर रहे थे। वह थर्ड डिग्री तायक्वोंडो और ब्लैक बेल्ट चैंपियन थे। वह ग़रीब बच्चों को निःशुल्क तायक्वोंडो सिखाया करते थे। महेश कहते थे कि मैं अपने बच्चों को तायक्वोंडो के अलावा भी बहुत सारी अच्छी बातें सिखाया करता हूं। मैं उनसे कहता हूं कि कभी शराब मत छूना, कभी अपराध मत करना। बहुत ज़्यादा शराब पीने को लेकर महेश कहते थे कि "मैं नशा करने के लिए नहीं बल्कि अपने बीते कल को भूलने के लिए शराब पीता हूं।"

महेश के जीवन का एक सबसे बड़ा दुख यह भी था कि वो अपने बेटे से दूर हो गए थे। उनके अनुसार उन्होंने अपने बेटे "त्रिशूल" को आख़िरी बार तब देखा था जब वह 9 महीने का था। अपने बेटे को याद करते हुए महेश अक्सर भावुक हो जाया करते थे। महेश बताते हैं कि मैं त्रिशूल को कार में घुमाया करता था। वह लगातार हॉर्न बजाकर हंसता था। महेश कहते थे ज़िंदगी में अकेला होना आसान नहीं है।

बॉलीवुड कलाकरों की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिलती थी। यह बेहद दुखदायक है कि जिस कलाकर ने अपना अहम योगदान बॉलीवुड को दिया हो बुरे वक़्त में उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आता है।

एक वक़्त के बाद बॉलीवुड लोगों का साथ छोड़ देता है। सिर्फ़ महेश ही नहीं हैं जिन्हें तन्हाई में मौत का सहारा मिला। ऐसे बहुत से सितारे रहें हैं जो गुमनामी के अंधेरे में टूट गए। शायद इस रंगीन दुनिया की यही काली सच्चाई है।


#MaheshAnand


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