• Newziya

जोजो रैबिट: नाज़ी, हिटलर की जर्मनी और दिव्या भारती की सीक्रेट एंट्री

“वह कट्टर है. उसे 3 हफ्ते लगे ये बात हज़म करने के लिए कि उसके दादा के बाल सुनहरे नहीं थे”

शशांक मिश्रा


देश जर्मनी है. 10साल का लड़का है,नाम है जोजो. हिटलर का प्रेमी है.उसके कमरे में हिटलर के पोस्टर लगे हैं.हिटलर की बातों वाले पैंफ्लेट लगे हैं.हालांकि, यह उस काल में हर जर्मन के घर की कहानी कही जा सकती थी.हिटलर की यंग सेना का सिपाही.कुल मिलाकर एक छोटा हिटलर समझ लो जिसके अंदर यहूदियों के लिए नफरत है…यहूदियों को देश से निकालने और युद्ध करने की इच्छा शक्ति है…लेकिन किसी को मारने की बात से ही कांप उठता है.

स्टोरी का प्लॉट क्या है?


जोजो

लड़का कट्टर है.सबसे ऊपर लिखा डायलॉग उसकी मां का है.लड़का जर्मनी की सेना में जाना चाहता है.देश के लिए लड़ना चाहता.कुल मिलाकर आसान भाषा में आप उसे राष्ट्रवादी कह सकते हैं.जैसे अपने यहां,भारत माता की जय न बोलने पर कुछ लोग दूसरों को देशद्रोही बोल देते हैं,मारने पर उतारू हो जाते हैं.वहां,जर्मनी में कोई ‘हेल हिटलर’ न कहे तो ऐसा स्वभाव जोजो के अंदर देखने को मिलता है.

नहीं, मैं यहां वालों को नाज़ी नहीं कह रहा…सिर्फ जोजो को राष्ट्रवादी बता रहा हूं.


जोजो की मां ने घर में एक यहूदी लड़की एल्सा को छिपा रखा.एक दिन जोजो को पता चलता है कि उसके ठेठ नाज़ी होते हुए भी उसके घर में एक यहूदी लड़की रह रही है.उन दोनों की बीच संवाद होते हैं और धीरे–धीरे प्यार होता है.यही है फिल्म का मोटा–माटी प्लॉट.और फिर होती दिव्या भारती की सीक्रेट एंट्री


मोहब्बत है चाहत, तिज़ारत नहीं…तिज़ारत नहीं


जैसे जैसे फिल्म आगे बढ़ती है. जोजो की कट्टरता कम होती, दोनों को प्यार होता. हालांकि वो बहस अलग है कि एक 10 साल का लड़का अपनी उम्र से बड़ी और विचारधारा में जानी दुश्मन लड़की से प्यार कैसे कर बैठा? जोजो की हिटलर से मोहब्बत कैसे एल्सा की तरफ ट्रांसफर होती, यह भी फिल्म में देखने लायक चीज़ है. प्यार की पहली सीढ़ी में जोजो के पेट में तितलियां दौड़ती हैं. इसके बाद वह एल्सा को खुश करने के लिए लाइब्रेरी से मशहूर कवि रिल्के की किताब भी उठा कर लाता है.

फिल्म में एक सीन है.


जब जोजो यहूदी लड़की एल्सा से पूछता है– जब तुम आज़ाद हो जाओगी तो क्या करोगी?

“डांस” लड़की जवाब देती है. लेकिन गाना कौन सा होगा ये नहीं बताती है.


जोजो, विश्वयुद्ध, यहूदी, हिटलर और डर


नाज़ीवाद और यहूदियों से दुश्मनी-

नाज़ीवाद राजनीतिक विचारधारा जिसे हिटलर ने शुरु किया था. हिटलर का मानना था कि जर्मन आर्य हैं और विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं . इसलिए उनको पूरी दुनिया पर राज करने का अधिकार है.

किताबें बताती हैं कि जर्मनी में हिटलर के दौर में एक बार आर्थिक संकट आया था. जिसके बाद हिटलर ने जनता को पूँजीपतियों और यहूदियों के खिलाफ भड़काना शुरु किया. 1930 में जर्मनी ने 50 लाख से अधिक व्यक्ति बेकार हो गए थे, जो बाद में चलकर हिटलर के समर्थक बन गए. एक दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टी (नाज़ी पार्टी) साम्यवाद के खिलाफ थी. हिटलर खुद साम्यवादी युद्ध–सिद्धांतों के खिलाफ़ था, जो बहुत कुछ मार्क्स और एंगल से प्रभावित थे. वह हर यहूदी को मार्क्सवादी युद्ध नीति का प्रचारक मानता था. वहीं, प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के पीछे भी हिटलर यहूदियों को ही दोषी मानता था. क्यूं मानता था. इसके लिए आप किताबें पढ़ें.


फिल्म का केंद्र जोजो है.केंद्र तो जर्मनी भी है.मौका है द्वितीय विश्व युद्द का.अमेरिका,इंग्लैंड,और रूस जैसे तमाम बड़े देश हिटलर से युद्द कर रहे हैं.और हर रोज़ जर्मनी की ओर कूच कर रहे हैं. अगर आप विश्व युद्ध के बारे में बहुत अच्छे तरीके से जानते हैं तो आपको यह फिल्म थोड़ी–सी प्रेडिक्टेबल लग सकती है.लेकिन उसके बावजूद भी बहुत कुछ है जो देखा जा सकता है.



जोजो के हाथ में रैबिट. अर्थात जोजो रैबिट

फिल्म में एक सीन है. ट्रेनिंग के दौरान टीम के कैप्टेन जोजो को एक खरगोश देते हैं और उसे मार देने की बात कहते हैं. लेकिन जोजो मारने की बात सुनकर ही कांपने लगता है और आखिर में वह उस खरगोश को नहीं मार पाता है. हां, इसी के घटना के बाद से उसे सब ‘जोजो रैबिट’ कहकर चिढ़ाने लगते हैं और फिल्म का नाम भी यहीं से पड़ा है.

हम सबके जीवन में एक ऐसा समय जरूर आया होगा, जब हम हिटलर के बारे में कुछ भी नहीं जानते होंगे. जानने के जो तरीके हैं, उन्होंने ही कभी हमें बताने की कोशिश नहीं की. खैर.

मैं जब तक हिटलर को ढंग से नहीं जानता था, तब तक मुझे वह एक कार्टून कैरेक्टर लगता था…शायद हिटलर की मूंछे देखकर मेरी ऐसी धारणा बनी हो. जब उसके बाद हिटलर को और जाना तो उसके बोलने का ढंग बड़ा अनोखा लगा. मतलब जब वह बोलता था, तो हाथों का भी इस्तेमाल करता था, शरीर भी हिलता–डुलता रहता था…बस यही कुछ दो–चार चीज़ें हैं जो बचपन और हिटलर के बारे में सोचकर स्मृति में आती हैं. शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं जर्मनी से 6748 किलोमीटर दूर पैदा हुआ.


प्यार, ज़िंदगी और ज्ञान की बातें


जोजो अपनी मां के साथ

एक सीन है. नदी के किनारे. जोजो और उसकी मां स्कॉरलेट जॉनस (फिल्म में रोज़ी, जोकि विचारधारा से एंटी नाज़ी है) बैठे बातें कर रहे हैं. दोनों के बीच संवाद है. यह संवाद इस फिल्म का सार है. सीखने की पहली सीढ़ी है, जीवन का ज्ञान है.

रोज़ी कहती है– ‘प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं’

जिसपर जवाब देते हुए जोजो कहता है– ‘लेकिन प्यार से जंग नहीं जीती जाती’

हो सकता है ऐसा डॉयलॉग आप 90s की फिल्मों में भी सुन चुके हों. लेकिन फर्क यह है कि यहां यह संवाद मां–बेटे के बीच है.

युद्द, वीभत्सता, हिटलर का अंत और मोरल ऑफ दि स्टोरी


फिल्म में 1 घंटा 25 मिनट बीत जाने के बाद अगले कुछ मिनट बहुत धीमे–धीमे से बढ़ते हैं.

हिटलर ने खुद को गोली मार ली है. नाज़ियों की सेना अब भी लड़ रही है. एक तरफ से अमेरिका ने हमला किया है. दूसरी तरफ रूस की आर्मी ने हमलावर है. यह युद्द का आखिरी समय है. यह कुछ 2-4 मिनट हैं लेकिन इन्हीं कुछ मिनटों में फिल्म की पूरी सीख और मोरल ऑफ दि स्टोरी पता चलती है.

6 साल बाद जब युद्ध ख़त्म हुआ तो 60 लाख यहूदी मारे जा चुके थे. एल्सा ज़िंदा थी, जोजो ने उसको बचाया था, जोजो के प्यार ने उसे बचाया था.

दोनों घर के बाहर निकलते हैं. अमेरिका सेना के जवान झंडा लेकर मार्च निकाल रहे हैं और नाज़ियों को पकड़–पकड़ कर मार रहे हैं. जगह–जगह टूटी इमारते हैं. जोजो के थप्पड़ पड़ता है. गाना बजना शुरु होता है. इंग्लिश में कोई. जोजो और एल्सा नाच रहे हैं जैसा कि वादा था.


जोजो और एल्सा

लेकिन जिन्होंने दिव्या भारती की रंग देखी उन्हें शर्तिया गाने के बोल सुनाई देंगे‘मोहब्बत है चाहत,तिज़ारत नहीं…तिज़ारत नहीं’

हिटलर अच्छा था, जर्मनी वाले उसे इतना क्यूं चाहते थे? यहूदियों से क्या दुश्मनी थी? इन सबकी बहसों में नहीं पड़ना चाहिए. फिल्में देखनी चाहिए. जोजो रैबिट जैसी. युद्द की भीषणता को समझना चाहिए. खासकर उनको जो आए दिन घर-मोहल्ले में होने वाली बहसों में पाकिस्तान में ऐटम बम फेंक देने की बातें करते हैं.


फ़िल्म को इस बार एक अकेडमी अवार्ड (बेस्ट राइटिंग-अडॉप्टेड स्क्रीनप्ले) भी मिला है. बाकी कॉस्ट के कई लोगों को नॉमिनेशन भी मिला.

ये फिल्म एक बार नहीं, दो बार नहीं, जितनी बार आप देख सकते हैं, उतनी बार देखें… बोर नहीं होंगे, कुछ और सीखकर ही लौटेंगे.


#jojo_rabbit #review #hitler #nazi

©Newziya 2019, New Delhi.