• Newziya

बुक रिव्यु- मुसाफ़िर कैफ़े : एक ऐसी कहानी जो आज के युवाओ को "GOALS" देगी!

Updated: Feb 12, 2019

जो लोग सन 2000 के बाद पैदा हुए है उनको अंग्रेजी में 'मिलेनियल' कहते है, और ये नाम पड़ने की एक वजह ये है की मिलेनियल को फ्यूचर की चिंता नहीं होती ये बस आज में जीते है, इनका प्रमुख उद्देश्य बस खाना और घूमना होता है. अगर भारतीय परिदृश्य में बात की जाए तो आजकल के बच्चों को मिलेनियल बनाया एक बॉलीवुड पिक्चर ने जिसका नाम था 'ये जवानी है दीवानी', सब के सब रणबीर कपूर बनने निकल गए, सब को फोटोग्राफर बनना है, दौड़ना है बस रुकना नहीं है.


दिव्य प्रकाश दुबे

इसी क्रम में ऐसी ही एक किताब है जो लड़को को असल मायने में मिलेनियल बना देगी और नए मायने में 'GOALS' देगी, जी हाँ ये किताब है दिव्य प्रकाश दुबे द्वारा लिखित "मुसाफिर कैफ़े", वैसे तो किताब को आये बहुत समय हो गया है, पर क्रेज लगातार बना हुआ है और इसको लिखने वाला नयी वाली हिंदी का बिगड़ा हुआ लड़का अपनी अगली किताब के साथ भी आ गया है, नाम है "अक्टूबर जंक्शन", आइये जानते है मुसाफिर कैफ़े को नज़दीक से न्यूज़िया के रिव्यु द्वारा :

किताब की शुरुआत से ही आपको किताब थोड़ी जाने पहचानी लगेगी क्युकी वही सुधा और चन्दर का जिक्र आएगा, जी हाँ वही धर्मवीर भारती जी के सुधा और चन्दर लेकिन यहां इस किताब के सुधा और चन्दर का भारती जी वाले सुधा और चन्दर से कोई लेना देना नहीं हैं बस इस किताब में कैरक्टर के नाम उधार लिए गए है और वजह जानने के लिए जब पढ़ेंगे तो दिल भर आएगा. दो लोग मिलते हैं, एक दूसरे को जाने पहचाने लगते है और जवाब आता है शायद कहानी में मिले होंगे. जिंदगी आगे बढ़ती है प्यार हो जाता है लेकिन शादी नहीं चाहिए होती है और फिर जिंदगी में अचानक एक मोड़ आता है और सब बदल जाता है, चन्दर पहाड़ो पे जाता है, सुधा से अलग रहता है, और वहाँ एक कैफ़े खोलता है, "मुसाफ़िर कैफ़े" जहां खाने के पैसे लगते है रहने के नहीं, है ना GOALS AF!

हम आपको ज्यादा नहीं बताएंगे, खुद पढ़ना होगा वैसे भी लोग कहते हैं की युवाओ की पढ़ने में दिलचस्पी खत्म सी होती जा रही तो आज ही किताब खरीदिये और पढ़ लीजिये.


मुसाफिर कैफ़े : दिव्य प्रकाश दुबे

आपका इंटरेस्ट बढ़ाने के लिए आपको किताब के कुछ वन लाइनर्स के साथ छोड़े जा रहे है.


"थोड़ा अजीब है लेकिन समंदर जितना बेचैन होता है हम उसके पास पहुंचकर उतना ही शांत हो जाते हैं, यही जिंदगी का है पूरा बेचैन हुए बिना जैसे शान्ति मिल ही नहीं सकती"


"जो लोग प्यार में होते है वो अपने साथ एक शहर, एक दुनिया लेकर चलते है. वो शहर जो मूवी हॉल के बीच में कार्नर सीट पर बसा हुआ होता है, वो शहर जो मेट्रो की आस पास की नज़रो को इग्नोर कर रहा होता है. वो शहर जिसको केवल वो पहचान पाते है जिन्होंने कभी अपना शहर ढूंढ लिया होता है या फिर जिनका शहर खो चूका होता है."


"कभी-कभी उदास शामें, उदास बातें भी करते रहना चाहिए, हमें सुकून तभी मिलता है जब हम उदासियों से लौट-लौटकर बार बार मिलते है."


"हर लाइफ का एक purpose होता है, वो purpose achieve करने के लिए."

"बस जिस दिन दिन तुम्हे अपने अलावा कोई दूसरा ऐसा मिल जाए जो तुम्हारी माचिस की डिबिया बिना खोले ही मान ले की धुप अभी भी वहां है डिबिया में है तब सोचना नहीं, उसके साथ ज़िन्दगी गुज़ार लेना"


"झूट से 'आखिर' तक बात चलती तो है. वर्ण सारे रिश्ते एक शाम में खत्म हो जाए"


"बिना भटके मिली हुई मंज़िल और जवाब दोनों ही नकली होते हैं, वैसे भी जिंदगी की मंज़िल भटकना है कही पहुंचना नहीं"


नयी वाली हिंदी via दिव्य प्रकाश दुबे

#newziya #bookreview #musafircafe #divyaprakashdubey

©Newziya 2019, New Delhi.