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एक और आतंकी हमला

प्रणव मिश्र

पढ़कर खून खौल उठेगा, 44 जवान शहीद हो गए हैं. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है. इस हमले में 20 से ज्यादा जवान जख्मी भी हुए हैं. उरी में सितंबर 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर में यह सुरक्षाबलों पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है. जम्मू-कश्मीर के पुलावामा जिले में गुरुवार शाम को सीआरपीएफ के एक काफिले को निशाना बनाया. आतंकी हमले में अबतक सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए हैं.


घायलों को इलाज के लिए ले जाते सुरक्षाकर्मी

आंतकियों ने श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर अवंतिपोरा इलाके में सीआरपीएफ के एक काफिले को निशाना बनाया. विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी लेकर आए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद ने सीआरपीएफ जवानों के काफिले की बस में टक्कर मार दी. आत्मघाती हमलावर आदिल 2018 में जैश में शामिल हुआ था. इस हमले के बाद से ही दक्षिणी कश्मीर के कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है. बताया जा रहा है कि आदिल अहमद डार नाम के आतंकी ने इस काफिले पर हमले की साजिश रची थी. इस हमले के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक से नहीं रूकेगी आतंकी गतिविधि, बातचीत से ही संभव है. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजजू ने कहा कि इसका बदला हम लेगें. उरी हमले के बाद सेना ने 10 दिन के भीतर पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक कर बदला लिया था. दरअसल जवानों को अपने हथियार भी नहीं उठा पाए थे. हमला उस वक्त हुआ जब जवान छुट्टी पूरी करने के बाद अपने ठिकानों पर वापस जा रहे थे. खुफिया एजेंसियों ने जारी किया था अलर्ट कश्मीर के पुलवामा में हमले को लेकर खुफिया एजेंसियों ने सात दिन पहले ही अलर्ट जारी किया था कि कश्मीर में सुरक्षाबलों को डिप्लॉयमेंट और उनके आने-जाने के रास्ते पर आतंकी IED से हमला कर सकते हैं. क्या हमले की पहले से थी पूरी तैयारी? न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सीआरपीएफ के जवानों पर गुरुवार शाम को अवंतिपोरा के गरीपोरा के पास घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला बोला. इस इलाके में हाईवे से गुजर रही बस में एक आतंकी विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर घुस गया और इस ब्लास्ट में पूरी बस उड़ गई. फिर सीआरपीएफ जवानों के वाहनों पर फायरिंग भी की. जैश के आतंकी आदिल अहमद उर्फ वक़ास कमांडो ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर जवानों की बस को टक्कर मारी. इस हमले के बाद जवानों को तुरंत श्रीनगर के हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का काम शुरू कर दिया गया. जिस काफिले पर यह हमला हुआ, वह जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था और इसमें 2.5 हजार जवान शामिल थे. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सीआरपीएफ के जिस काफिले पर हमला किया गया, उसमें 70 वाहन शामिल थे.

जैश-ए-मुहम्मद से सम्बंधित कुछ घटनाएँ •दिसम्बर 1999 में अपहृत भारतीय विमान आईसी 814 के यात्रियों को बचाने के लिए मसूद अज़हर को कंधार ले जाकर छोड़ दिया गया. •मार्च 2000 में मसूद अज़हर ने हरकत-उल-मुजाहिदीन को बंटवाकर जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना करी। हरकत-उल-मुजाहिदीन के अधिकतर सदस्य जैश में शामिल हो गए. •आरोप है कि दिसम्बर 2001 में जैश ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर नई दिल्ली में भारतीय संसद पर आत्मघाती हमला किया. •आरोप है कि फ़रवरी 2002 में जैश ने अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल को गर्दन काटकर मार दिया. •मई 2009 में जैश सदस्य होने का ढोंग कर रहे एक अमेरिकी पुलिसवाले ने चार लोगों को न्यू यार्क में एक सिनागोग (यहूदी मंदिर) उड़ाने और अमेरिकी सैनिक विमानों पर मिसाइल चलाने का षड्यंत्र रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया.

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