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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हो रहा है सुसाइड लेटर कॉम्पटीशन: नाम है आख़िरी अल्फाज़

Updated: Apr 5, 2019

आनन्द श्रीवास्तव

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शताब्दी छात्रावास का वार्षिकोत्सव होने जा रहा है। जिसका नाम है "उद्बोधन- एक जागृति 2019" कार्यक्रम के दौरान हर वर्ष तमाम प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। 22 फ़रवरी को हो रहे इस वार्षिकोत्सव में हर बार की तरह इस बार भी रचनात्मक लेखन की प्रतियोगिता होनी है। लेकिन इस बार रचनात्मक लेखन का विषय है "आत्महत्या पत्र लेखन".

शताब्दी छात्रावास

इस आत्महत्या पत्र लेखन प्रतियोगिता का नाम रखा गया है #आख़िरी_अल्फाज़। जिसमें भाग लेने के लिए आपको मात्र 50 रुपए का शुल्क देना है और 250-400 शब्दों का सुसाइड लेटर लिखना है। इसमें आप शायरियां - कविताएं, दोहे और छंद भी लिख सकते हैं। जीतने वाले को नक़द पुरस्कार भी दिया जाएगा। अब शताब्दी छात्रावास के अंतःवासी इस प्रतियोगिता से किस प्रकार का उद्बोधन करना चाह रहे हैं या कैसी जागृति लाना चाह रहे हैं वही बता सकते हैं। इससे पहले लव लेटर रायटिंग कॉम्पटीशन होता था. जिसका उद्देश्य तो समझ आता था लेकिन सुसाइड लेटर रायटिंग कॉम्पटीशन का उद्देश्य बहुत डरावना और आत्मघाती मालूम होता है.


उद्बोधन 2019 के कार्यक्रम

वार्षिकोत्सव और प्रतियोगिता अपनी जगह ठीक हैं लेकिन मायने यह रखता है कि आप समाज में संदेश क्या भेज रहे हैं?

जब हाल ही में आपके विश्वविद्यालय का एक छात्र रजनीकांत यादव आत्महत्या करके अपना जीवन ख़त्म कर चुका है तो क्या ऐसे में इस तरह की प्रतियोगिता का आयोजन उसकी मृत्यु का उपहास नहीं है?

शताब्दी छात्रावास जिस तरह से आत्महत्या जैसे सीरियस मसले पर नॉनसीरियसनेस दिखाते हुए रचनात्मकता तलाश रहा है यह उसकी असंवेदनशीलता ही दर्शाता है।

आइए आपको बताते हैं कि आत्महत्या कितनी गंभीर समस्या है.......

WHO के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में होने वाली तमाम मौतों में 1.4% मौत का कारण आत्महत्या होती है। 2016‌ में होने वाली मौतों में "आत्महत्या" 18वां शीर्ष कारण रही थी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के एक ताजा शोध में यह पता चला है कि भारत में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या कर लेता है।


सांकेतिक तस्वीर source: internet

आज जब दुनिया की तमाम सरकारें और गैर सरकारी संगठन भावनात्मक रूप से कमज़ोर लोगों को आत्महत्या से रोकने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं उन्हें शिक्षित कर रहे हैं। तब इस स्थिति में किसी कार्यक्रम द्वारा आत्महत्या का गुणगान करने के लिए क्रिएटिव सुसाइड लेटर लिखने की प्रतियोगिता रखना शुद्ध मूर्खता ही कहा जाएगा।

मुंबई की एक संस्था जिसका नाम Sisters living works है। जो आत्महत्या के ख़िलाफ़ मुंबई में लोगों को जागरूक करने का काम करती है। इस संस्था ने Storypick वेबसाइट से बात करते हुए शताब्दी छात्रावास के इस कार्यक्रम की निंदा की और कहा कि "उन्हें इस कार्यक्रम को रद्द कर देना चाहिए। क्योंकि हर साल दुनिया में लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। इनमें से लगभग 1 लाख 35 हजार यानी 17% भारतीय होते हैं। पिछले ढाई साल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ही 2 छात्रों ने आत्महत्या की है। लोगों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के बजाए यह प्रतियोगिता छात्रों को जानबूझकर आत्महत्या करने के बारे में सोचने और लिखने को विवश करेगी।"

रचनात्मक लेखन की प्रतियोगिता के लिए दुनिया में असंख्य विषय हैं। ऐसे में इस तरह के निराशाजनक विषय को चुनना आत्महत्या को बढ़ावा देने की ओर एक दुस्साहसिक क़दम ही कहा जाएगा।

छात्रावास का वार्षिकोत्सव समारोह ज़्यादातर वरिष्ठ छात्रों एवं छात्र नेताओं की देखरेख में होता है। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और हॉस्टल के निरिक्षक / सुप्रिटेंडेंट भी बुलाए जाते हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि इ‌स कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की क्या राय है?

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