• Vishwajeet Maurya

ऑस्ट्रेलिया: जंगलों की आग से बेहाल हुआ सिडनी, तापमान के टूटे सारे रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में बीते तीन महीने से जारी आग में पचास करोड़ से ज़्यादा जानवरों की मौत हो चुकी है. झाड़ीनुमा जंगल में आग पिछले साल सितंबर से ही लगी है. कम से कम 28 लोगों की जान जा चुकी है. जितना बड़ा डेनमार्क है उससे बड़ा ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा आग की चपेट में है. कम से कम दो हज़ार घर तबाह हो चुके हैं. आशंका है कि हालात और बुरे होंगे.

तापमान के टूटते सारे रिकॉर्ड, सूखे जंगल और तेज़ हवा के कारण आग और भयावह हो गई है. इसी महीने सिडनी का तापमान 49 डिग्री तक पहुंच गया था. 2017 से न्यू साउथ वेल्स और क्वीन्सलैंड में बारिश लगातार कम होती गई. बारिश नहीं होने का असर ना केवल कृषि उत्पादन पर पड़ा बल्कि इससे आग फैलने में भी मदद मिली. ये आग कितनी भयावह है, इसका अंदाज़ा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि इस आग से अब तक 1 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलकर राख हो चुका है.



नासा ने बताया है कि, आस्ट्रेलिया की बुशफायर का धुंआ विश्व के चक्कर लगाने के बाद फिर से ऑस्ट्रेलिया के ऊपर पहुंच रहा है. हालांकि, एक विशेषज्ञ ने कहा है कि यह नग्न आंखों को दिखाई नहीं दे सकता है।



पिछले कुछ हफ्तों में कैनबरा, एडिलेड, मेलबर्न और सिडनी सहित कई ऑस्ट्रेलियाई शहरों में पहले से ही धुएं के गुबार उठे हैं, जहां दिसंबर के बीच में वायु की गुणवत्ता सबसे खराब थी। धुएं की बढ़त पर नज़र रखने वाले सैटेलाइट इमेजिंग से पता चलता है कि यह तस्मान सागर और फिर प्रशांत महासागर के ऊपर बह रहा है।

एजेंसी ने अपनी वेबसाइट पर कहा, "पिछले सप्ताह के दौरान, नासा के उपग्रहों ने ऑस्ट्रेलियाई आग और उसके बाद के पूर्वी फैलाव से वातावरण में इंजेक्ट किए गए धुएं की एक असाधारण मात्रा देखी है। धुआं दुनिया भर में कम से कम एक पूरा सर्किट बनाने की उम्मीद है और यह ऑस्ट्रेलिया के ऊपर एक बार फिर से आसमान में लौट रहा है।"



नासा कम से कम पिछले एक पखवाड़े से ऑस्ट्रेलियाई झाड़ियों से निकलने वाले धुएं की आवाजाही की निगरानी कर रहा है, उस दौरान धुएं ने तस्मान सागर को पार कर लिया है।

एजेंसी ने कहा, "न्यूजीलैंड में धुएं का नाटकीय प्रभाव पड़ रहा है, जिससे देश भर में हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है और पहाड़ पर बर्फ जम रही है।"

नासा ने कहा कि न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया, एडिलेड हिल्स, और कंगारू द्वीप सहित ऑस्ट्रेलिया भर की झाड़ियों से भीषण गर्मी ने हालात ख़राब कर रखे हैं. न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिक लिसा हार्वे-स्मिथ नासा के चित्रों के माध्यम से धुएं की बढ़ोत्तरी पर नज़र बनाये हुए हैं। न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) में 123 से ज़्यादा जगहों पर आग लगी है. एनएसडब्ल्यू रूरल फायर सर्विस के मुताबिक़ अब तक दो हज़ार से ज़्यादा घर जल चुके हैं.



नासा ने कहा है कि ऑस्ट्रेलियाई हवाई क्षेत्र में धुआं ज्यादा लंबे समय तक नहीं होगा।

प्रोफेसर हार्वे-स्मिथ ने कहा कि "मैं उम्मीद करूंगा कि धुआं पूरी तरह से दुनिया के चक्कर लगा सकता है और अगले कुछ दिनों में पश्चिमी आस्ट्रेलिया के दक्षिणी हिस्सों के ऊपर दिखाई देगा, शायद जमीनी स्तर पर नहीं बल्कि वातावरण में ज्यादा होगा."

प्रोफेसर हार्वे-स्मिथ ने कहा कि धुएं के बादल "पहले से ही दुनिया के तीन-चौथाई के आसपास छाए हुए थे" और आग से उत्पन्न होने वाली आंधी के साथ इसकी मात्र ज्यादा हो गयी और समुद्र स्तर से 17 किलोमीटर ऊपर पहुंच गया था।

उन्होंने कहा कि "उस ऊँचाई पर होने के कारण धुआं अपेक्षाकृत वायुमंडल और मौसम के ऊपर अपेक्षाकृत बेरोक-टोक बह रहा है. "


एबीसी न्यूज ब्रेकफास्ट के मौसम के प्रस्तोता नैट बर्न ने कहा कि धुआं समय के साथ संभवतः पतला हो जाएगा क्योंकि यह दक्षिण अमेरिका को पार कर गया है, जिसका अर्थ यह है कि ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर से पहुंचने के बाद यह धुंआ दिखाई न दे।

“लेकिन इन आग इतनी बड़ी मात्रा में लगी हुई हैं, वह अभी भी जल रही हैं, और जैसी स्थिति है उसे देखते हुए तो यह लग रहा है आग थोड़े समय तक ऐसी ही बनी रहेगी . हवा में धुएं के कणों की आपूर्ति का लगातार बने रहना भी एक कारण है।"



"जब तक हवा ऑस्ट्रेलिया के पश्चिम में चारों ओर बनी रहेगी, तब तक वातावरण में ऊपर या नीचे, स्वच्छ हवा को बेहतर होने में बहुत समय लगेगा, इसलिए तब मोटे धुएं को लोग नहीं देख पाएंगे जैसे कि, वे आग के ठीक बगल में देखते हैं।

"सबसे अधिक संभावना है कि हम इसका पता, अपने एकमात्र तरीके यानी कि सैटेलाइट की मदद से लगा पायें।"



"हालांकि, बर्न ने कहा कि यह अभी भी संभव है कि पर्थ के स्थानीय लोग जल्द ही धुंधला दिन एक बार फिर से देखें. उन्होंने कहा, जबकि यह अभी तक पश्चिमी तट पर नहीं पहुंचा था, पर यह शायद कुछ "दिनों के भीतर पश्चिमी तट पर होगा।"

उन्होंने कहा कि, धुआँ के कण गायब नहीं होते बल्कि उन्हें किसी न किसी तरह हवा से निकालना पड़ता है।



"यह ठीक उसी तरह है जैसे आप बहुत बड़े ज्वालामुखी विस्फोट देखते हैं, उनमें से राख दुनिया भर में कई बार घूमती रहती है और काफी समय के लिए कहर पैदा कर सकती है।"



-Govind Pratap Singh

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