• Vishwajeet Maurya

UP B.Ed. Entrance Exam 2020: परीक्षा के नाम पर साढ़े 4 लाख़ अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ क्यों?

देश भर में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है. कोरोना को लेकर लोगों से सतर्कता बरतने को कहा जा रहा है. मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाईजेशन को जरूरी बताया जा रहा है. कोरोना को ध्यान में रखते हुए जहाँ रामजन्मभूमि के भूमिपूजन में केवल 200 लोगों को निमंत्रण दिया जा रहा है, शादियों में केवल 50 लोगों को बुलाने की अनुमति है तो वहीं परीक्षा के नाम पर 4 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कहाँ तक जायज़ है?

Report- Govind Pratap Singh


लखनऊ: जब देश में रोज़ कोरोना के 50 हज़ार से ज्यादा मामले आ रहे हैं. पूरे देश में कोरोना मरीजों की संख्या 20 लाख के लगभग है. वहीं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में कोरोना को लेकर हालात गंभीर हैं, 4500 से अधिक मरीज रोज संक्रमित पाए जा रहे हैं. ऐसे में 9 अगस्त को प्रस्तावित बी.एड. प्रवेश परीक्षा का छात्र विरोध कर रहे हैं, जिसमें 4 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को शामिल होना है. अभ्यर्थियों का कहना है कि यह समय मेडिकल इमरजेंसी का है, ऐसे समय पर शासन के द्वारा प्रवेश परीक्षा कराया जाना किसी खतरे से कम नहीं है.


लखनऊ यूनिवर्सिटी के द्वारा आयोजित की जा रही इस परीक्षा के लिए 4 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रदेश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में यात्रा करेंगे, ऐसे में यदि एक को भी संक्रमण हुआ तो सैंकड़ों लोग इसके शिकार हो सकते हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थियों की मांग है कि शासन ऐसे समय में परीक्षा को स्थगित कर दे और जब हालात थोडा बेहतर हो तब परीक्षा की तिथि फिर से निर्धारित कर परीक्षा संपन्न करवाई जाए.



किसी का गृह जनपद धनबाद, प्रयागराज तो बी.एड. परीक्षा का सेंटर बाराबंकी, कासगंज और कन्नौज


एक अभ्यर्थी का घर झारखण्ड के धनबाद में है, लेकिन उनका परीक्षा केंद्र उनके घर से लगभग 760 किलोमीटर दूर बाराबंकी में दिया गया है. अभ्यर्थी बस इसी बात को लेकर परेशान है कि “उत्तर प्रदेश में अनलॉक के बावजूद अभी भी लॉकडाउन जैसे हालात हैं. खासकर शनिवार और रविवार के दिन सरकारी लॉकडाउन घोषित है और पूरे प्रदेश में लॉकडाउन की कठोर शर्तें लागू रहती हैं. वहीं बी.एड. की परीक्षा भी 9 अगस्त, दिन रविवार को है. कोरोना और लॉकडाउन के बीच साढ़े 700 किलोमीटर दूर स्थित परीक्षा केंद्र पर सफ़र करके कैसे पहुंचा जायेगा व उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?”


प्रयागराज के प्रशांत शर्मा और देवेंद्र शुक्ला का परीक्षा केंद्र क्रमशः उत्तर प्रदेश के जिलों कासगंज और कन्नौज में दिये गये है. अन्य दूसरी परीक्षाओं (यूपीएससी, यूपीपीएससी) में कोरोना की स्थिति को देखते हुए परीक्षा केंद्र बदलने का विकल्प आया था लेकिन यूपी बी.एड. की परीक्षा के लिए ऐसा कोई विकल्प दिया ही नहीं गया. बस कोविड के हालातों को देखते हुए इस परीक्षा को 16 जिलों की बजाय प्रदेश के 73 जिलों में विस्तारित करने का फैसला किया गया है.



परीक्षा को लेकर क्या हैं आयोजकों का तर्क ?


यूपी बी.एड. प्रवेश परीक्षा की समन्वयक और लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापक प्रोफेसर अमिता बाजपेई कहती हैं कि, “परीक्षार्थियों को कोविड के समय अधिक दिक्कत ना हो, इसलिए शासन ने इसे 16 जिलों की बजाय अब प्रदेश के 75 में से 73 जिलों में कराने का फैसला लिया है. परीक्षा केंद्रों के सवाल पर उन्होंने कहा कि अधिकतर अभ्यर्थियों को उनकी पहली चॉइस यदि नहीं मिल पाई है तो दूसरी या तीसरी चॉइस देने की कोशिश की गई है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सभी के लिए ऐसा संभव नहीं था, इसलिए कुछ अभ्यर्थी ऐसे हो सकते हैं जिनको उनके चॉइस का परीक्षा केंद्र ना मिला हो. उन्होंने कहा कि कोरोना को देखते हुए संपूर्ण परीक्षा केंद्र को सैनेटाइज किया जाएगा और इसके लिए अलग से प्रत्येक केंद्र को 10 हजार रूपये बजट देने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए सीट प्लान भी निर्धारित किया जाएगा. वहीं परीक्षार्थियों को सैनिटाइजर, पानी का बॉटल और रूमाल जैसे मूलभूत चीजें लाने की सलाह दी गई है. उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि बी.एड. परीक्षा को देखते हुए इस सप्ताह की शनिवार और रविवार की लॉकडाउन में छूट दिया जाए और ढाबे, होटल, ट्रांसपोर्ट सुविधाओं को चलाया जाए ताकि परीक्षार्थी आसानी से परीक्षा केंद्र पहुंच सकें.”


हालांकि कई अभ्यर्थी अमिता बाजपेई की इन बातों से संतुष्ट नहीं दिखें. उनके अनुसार, उन्हें ना सिर्फ कोरोना का डर है, बल्कि इस बात की चिंता है कि महामारी के समय में वह अपने घर से 300-700 किलोमीटर दूर कैसे जाएंगे, कहां रूकेंगे, क्या खाएंगे?


अभ्यर्थियों का कहना हैं कि, "अमिता मैम, जिस आसानी से यह बात कह रही हैं कि डरने की जरूरत नहीं है, सबकी सुविधा का ख्याल रखा गया है, वह इतना आसान है नहीं. कुछ छात्रों का कहना है कि उनके परिचय में ऐसे कई छात्र हैं, जिनका सेंटर इटावा, ललितपुर, कन्नौज मिला है जबकि उनके सेंटर की प्राथमिकता में प्रयागराज और नजदीकी जिले शामिल थे. प्रयागराज से ललितपुर की दूरी लगभग 440 किलोमीटर से अधिक है. ठीक इसी तरह कन्नौज-इटावा भी 400 से अधिक किलोमीटर दूर हैं. ऐसे में आप बताएं कि अभ्यर्थी इस महामारी के समय में कहां रूकेंगे, कहां खाना खाएंगे? अगर 100-150 किलोमीटर की दूरी हो तो एक बार सोचा भी जा सकता था. जब लाखों बच्चें परीक्षा देने किसी तरह बस, आटो, टैक्सी में सफ़र करेंगे तब ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेन्सिंग कैसे मेनटेन हो पाएगी! हमारे स्वास्थ्य और सुरक्षा की जवाबदेही किसकी होगी? इसलिए सरकार से अनुरोध है कि वह अपनी इस आदेश पर पुनः विचार करें और जल्दबाजी से बचें."


कई अभ्यर्थियों ने सप्ताह भर पहले ही कर्नाटक में हुए कर्नाटक कॉमन एंट्रेस टेस्ट (KCET) का भी हवाला दिया, जिसमें लगभग 60 अभ्यर्थी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे.

इस परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की भीड़ को लेकर आशंका जताई जा रही थी कि यह ख़तरनाक हो सकता है पर प्रशासन परीक्षा कराने पर अड़ा रहा और नतीज़ा 60 छात्र कोरोना से संक्रमित हो गए.

तस्वीर: कर्नाटक में आयोजित KCET परीक्षा का एक एग्जाम सेंटर

यह तस्वीर कर्नाटक में आयोजित KCET परीक्षा के एक एग्जाम सेंटर की है. इसी परीक्षा के बाद ही 60 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे.


इस संबंध में हाईकोर्ट में अधिवक्ता और समाजसेवी विमलेश निगम जी ने बी.एड. प्रवेश परीक्षा समिति सहित प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर परीक्षा रद्द करने या अभ्यर्थियों को नजदीकी परीक्षा केंद्र को एलॉट करने की मांग की है।


Image: विमलेश

बातचीत में विमलेश जी बताते हैं कि, “यह सिर्फ परीक्षा में शामिल हो रहे 4 लाख 31 हजार 904 परीक्षार्थियों का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश का मामला है. इन परीक्षार्थियों में लगभग 50 फीसदी महिला परीक्षार्थी हैं, जिनके साथ कोई ना कोई उनके परिवार का पुरूष भी उन्हें परीक्षा दिलाने साथ में जाएगा. इसके बाद ये अभ्यर्थी लौटकर अपने घर को ही आएंगे. ऐसी परिस्थिति में अगर एक परीक्षा केंद्र पर कोई एक संक्रमित होगा, तो संक्रमण चेन से सैकड़ों लोगों तक संक्रमण का खतरा पहुंच सकता है और ऐसा नहीं है कि यह परीक्षा एक या दो घंटे की है. दो पालियों की यह परीक्षा कुल 6 घंटे में होनी है, इसके अलावा परीक्षा के दौरान एक घंटे का ब्रेक भी दिया जाएगा. इन 7 घंटों के दौरान दूसरे शहरों से आए अभ्यर्थी खाने-पीने की कैसे करेंगे? क्योंकि जिस दिन यहाँ परीक्षा आयोजित हो रही है उस दिन साप्ताहिक लॉकडाउन का दूसरा दिन यानि कि रविवार होगा. अगर आस-पास कुछ दुकानें भी होंगी तो वहां पर भी भीड़ बढ़ेगी और सोशल डिस्टेंसिंग नहीं तय की जा सकेगी.”


इसके अलावा परीक्षा के 6 घंटों के दौरान अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित हुआ, तो पहले वह अपने कमरे के सभी लोगों को संक्रमित कर सकता है, उसके बाद यह संक्रमण यात्रा के दौरान अन्य लोगों में और फिर घर आने के बाद परिवार में भी फैलने का खतरा है! इसलिए माकूल स्थिति यही होगी कि सरकार अभ्यर्थियों व प्रदेश वासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा को कुछ समय के लिए टाल दें."





इन सभी बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए विमलेश जी ने यह पत्र एक सप्ताह पूर्व लिखा था, जिसका उनके पास अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. परीक्षा में केवल दो दिन बाकी हैं और शासन भी इस परीक्षा को कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.


वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने मीडिया को बताया है कि, “बी.एड. प्रवेश पत्र वालों को लॉकडाउन के दौरान एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने की छूट दे दी गयी है. इस दौरान उनके लिए आवागमन के सरकारी और निजी साधन भी उपलब्ध रहेंगे.”

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