• Vishwajeet Maurya

अमेरिका-ईरान में नए प्रतिबंधों को लेकर ठनी

Updated: Jun 30, 2019

अमरीका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसकी घोषणा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने की. नए प्रतिबंधों के दायरे में ईरान के प्रमुख नेता अली खामनेई को भी रखा गया है.


अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ये नए प्रतिबंध अमरीकी ड्रोन पर हुए हमलों और कई अन्य वजहों से लगाए गए हैं. इन प्रतिबंधों का आदेश जारी करने के बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि प्रतिबंधों के दायरे में अयातुल्लाह ख़मेनेई को शामिल करना बेहद ज़रूरी था. उन्होंने कहा, ''ईरान के सर्वोच्च नेता ही उनकी सत्ता के दौरान होने वाले सभी कामों के लिए ज़िम्मेदार हैं. उन्हें उनके देश में बहुत सम्मान दिया जाता है. उनके अंतर्गत सबसे खतरनाक चीजें आती हैं, जिसमें इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की सेना भी है. इन प्रतिबंधों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता, उनका दफ्तर और उनसे ताल्लुक रखने वाले अन्य सभी लोग किसी भी तरह के वित्तीय सहयोग से वंचित हो जाएंगे.'' वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इन नए प्रतिबंधों को युद्ध की तरफ अमरीका का एक और कदम बताया है. ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने ट्वीट कर इन प्रतिबंधों को अमरीका की घृणित कूटनीति बताया है. उन्होंने लिखा है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध का प्यासा है.


ईरान के “ट्रम्प कार्ड” हैं ख़ामनेई

ग़ौर करने वाली बात ये है कि इन नए प्रतिबंधों के दायरे में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामनेई को भी लाया गया है. ख़ामनेई ईरान के आध्यात्मिक नेता और सर्वोच्च अधिकारी हैं. डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि ख़ामनेई पर प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं, "क्योंकि ईरान शासन में हो रहे प्रतिकूल कामों के लिए वहीं ज़िम्मेदार हैं."

अयातुल्लाह ख़ामनेई बार-बार पश्चिम, ख़ासकर अमरीका की निंदा करते रहे हैं. हालांकि वो किसी भी तरह की बातचीत का समर्थन करते हैं. लेकिन ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर विश्व शक्तियों के साथ चर्चा के बाद निकले निष्कर्ष को लेकर उनका रुख़ निराशाजनक रहा है. अयातुल्लाह ख़ामनेई ने 1989 में ईरान गणराज्य के संस्थापक और पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ोमैनी की जगह ली थी. इससे पहले वो 1981-1989 तक दो बार राष्ट्रपति रहे. सात साल पहले ईरान और दुनिया में अयातुल्लाह ख़ामनेई की मौत की अफ़वाह उड़ गई थी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने बताया ही नहीं कि उन्हें फ्लू हो गया है, जिसकी वजह से वो सार्वजनिक समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे थे. ईरान में अयातुल्लाह की सेहत के विषय को गोपनीय रखा जाता है. वास्तव में ईरान के सर्वोच्च नेता हैं. ईरान के राजनीतिक और सैन्य मामलों में आख़िरी फ़ैसला उन्हीं का होता है. उनके पास बहुत सी आर्थिक ताक़त भी है.


ख़ामनेई 'सेताद' नाम की संस्था की देखरेख भी करते हैं. इस संस्था ने 1979 की क्रांति के बाद छोड़ी गई संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था और इससे 95 अरब डॉलर का एक बड़ा बिज़नेस खड़ा किया गया. सेताद पर पहले से अमरीकी प्रतिबंध लगे हुए हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अब इसपर और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसके ज़रिए अयातुल्लाह ख़ामनेई से जुड़े लोगों को निशाने पर लिया गया है. इनमें कंपनी में काम करने वाले लोग या उनकी 'शैडो गवर्नमेंट' के अधिकारी शामिल हैं. डॉनल्ड ट्रंप के मुताबिक़ ईरान जो कुछ भी कर रहा है, उसके पीछे ख़ामनेई का दिमाग़ है. उनका कहना है कि ख़ामनेई के अंतर्गत सबसे ख़तरनाक चीज़ें आती हैं, जिसमें इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की सेना भी है. ट्रंप के कार्यकारी आदेश के मुताबिक़ ताज़ा प्रतिबंधों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता, उनका दफ्तर और उनसे जुड़े अन्य सभी लोग किसी भी तरह के वित्तीय सहयोग से वंचित हो जाएंगे.


बातचीत की गुंजाइश नामुमकिन ?

अमरीकी वित्त मंत्रालय के अनुसार रेवोल्यूशनरी गार्ड के आठ कमांडरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और नए प्रतिबंधों के चलते ईरानी संपत्ति के अरबों डॉलर फ्रीज़ कर दिए जाएंगे. अमरीकी वित्त मंत्री स्टीव म्नुचिन ने पत्रकारों को बताया कि अमरीका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा,''राष्ट्रपति का बिल्कुल साफ रुख है, अगर वो दोबारा बातचीत की मेज पर लौटना चाहते हैं तो हम तैयार है, अगर वो नहीं चाहते तो हम भी नहीं चाहते. जो लोग यह बोल रहे हैं कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक प्रतिबंध हैं, तो ऐसा नहीं है. हमने सचमुच में ईरान के अरबों डॉलर रोक दिए हैं. इन प्रतिबंधों का बहुत व्यापक असर देखने को मिलेगा.'' वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र में मौजूद ईरान के राजदूत माजित तख्त रवांची ने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे नहीं है कि अमरीका के साथ बातचीत की जा सके. उन्होंने कहा, ''हम सभी जानते हैं कि बातचीत के लिए कुछ तय नियम और शर्ते होती हैं. आप किसी भी ऐसे देश या शख्स के साथ बातचीत नहीं कर सकते जो आपको धमका रहा हो या डरा रहा हो. हम उनके साथ बातचीत कैसे शुरू कर सकते हैं जबकि उनका प्रमुख काम ही ईरान पर प्रतिबंध लगाना है. इसलिए मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है.''


ईरान और अमरीका के बीच बीते कुछ हफ्तों से लगातार तनाव बढ़ रहा है. अमरीका ने मई 2018 में ईरान से हटाए गए सभी प्रतिबंधों को दोबारा लागू कर दिया था, ये प्रतिबंध साल 2015 में हुए परमाणु समझौते के बाद हटाए गए थे. अमरीका और ईरान के बीच संबंधों में खटास तब आने लगी जब अमरीका ने पिछले साल खुद को इस समझौते से अलग कर दिया. इसके कुछ वक्त बाद ईरान भी इस समझौते से आंशिक तौर अलग हो गया. टकराव के इसी माहौल के बीच खाड़ी में मौजूद सऊदी के तेल टैंकरों पर हमले हुए, जिसके पीछे अमरीका ने ईरान का हाथ बताया. ईरान ने इन आरोपों से इंकार किया और घोषणा कर दी कि 27 जून के बाद वह अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय सीमा से ज्यादा बढ़ाएगा.

कुछ दिन बाद अमरीका के एक ड्रोन को ईरान ने मार गिराया. अमरीका का दावा था कि वह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पर था जबकि ईरान का कहना है कि वह उसकी सीमा में प्रवेश कर चुका था.

अब तो समय ही बताएगा कि नए प्रतिबंधों के बाद अमरीका और ईरान के बीच चल रहा टकराव क्या रुख लेता है.


-Govind Pratap Singh

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