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आइये न्यूज़िया के ज़रिये जानते हैं आखिर क्या है वियना सन्धि!

आजाद और संप्रभु देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर सबसे पहले 1961 में वियना कन्वेंशन हुआ. इसके तहत एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संधि का प्रावधान किया गया जिसमें राजनियकों को विशेष अधिकार दिए गए. इसके आधार पर ही राजनियकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का प्रावधान किया गया.


वियना कन्वेंशन -1971


  • इस संधि के तहत मेजबान देश अपने यहां रहने वाले दूसरे देशों के राजनियकों को खास दर्जा देता है. इस संधि का ड्राफ्ट इंटरनेशनल लॉ कमीशन ने तैयार किया था और 1964 में यह संधि लागू हुई.

  • इस संधि के प्रमुख प्रावधानों के तहत कोई भी देश दूसरे देश के राजनियकों को किसी भी कानूनी मामले में गिरफ्तार नहीं कर सकता है. साथ ही राजनयिक के ऊपर मेजबान देश में किसी तरह का कस्टम टैक्स नहीं लगेगा.

  • 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसी से मिलती जुलती एक और संधि का प्रावधान किया जिसे ‘वियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस’ के नाम से जाना जाता है.

  • भारत ने आई.सी.जे. में जाधव का मामला इसी संधि के तहत उठाया है. इस संधि पर अभी तक 179 देश सहमत हो चुके हैं. इस संधि के तहत कुल 79 आर्टिकल हैं.

  • इस संधि के आर्टिकल 31 के तहत मेजबान देश दूतावास में नहीं घुस सकता है और उसे दूतावास के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी है.

  • इसके आर्टिकल 36 के तहत अगर किसी विदेशी नागरिक को कोई देश अपनी सीमा के भीतर गिरफ्तार करता है तो संबंधित देश के दूतावास को बिना किसी देरी के तुरंत इसकी सूचना देनी पड़ेगी.


वियना संधि: भारत- पाकिस्तान साभार: इंडिया टुडे
  • भारत ने आई.सी.जे. में इसी आर्टिकल 36 के प्रावधानों का हवाला देते हुए जाधव का मामला उठाया है.

  • इस संधि में यह भी प्रावधान है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में जैसे जासूसी या आतंकवाद आदि में गिरफ्तार विदेशी नागरिक को राजनयिक पहुंच नहीं भी दी जा सकती है खासकर तब जब दो देशों ने इस मसले पर कोई आपसी समझौता कर रखा हो.

  • भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 में इसी तरह का एक समझौता हुआ था जिसका जाधव मामले में पाकिस्तान बार-बार हवाला दे रहा है. इसी समझौते का बहाना बनाकर पाकिस्तान जाधव को राजनयिक पहुंच देने से इनकार कर रहा है.

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