• Vishwajeet Maurya

14 जून: विश्व रक्तदाता दिवस

सभ्यता के विकास की दौड़ में मनुष्य भले ही कितना आगे निकल जाए, पर जरूरत पड़ने पर आज भी एक मनुष्य दूसरे को अपना रक्त देने में हिचकिचाता है। इसीलिए आज पूरी दुनिया में 14 जून 2019 को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है. ताकि लोगों के बीच “रक्तदान-महादान” की कहावत को चरितार्थ की जा सके.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (World Health Organization) ने विश्व रक्तदान दिवस की शुरुआत साल 2004 से की. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य “सुरक्षित रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना और रक्तदाताओं के सुरक्षित जीवन रक्षक रक्त के दान करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आभार व्यक्त करना है. इस साल 2019 की थीम ‘Safe Blood for All’ है, यानी सभी के लिए सुरक्षित रक्‍त की व्‍यवस्‍था करना है.” इस थीम के द्वारा उन लोगों को प्रोत्‍साहित किया जाना है, जो अभी तक इस अभियान से नहीं जुड पाए हैं.



14 जून ही रक्तदान दिवस क्यों?

विश्व रक्तदान दिवस, शरीर विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन की याद में पूरी विश्व में मनाया जाता है. महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन का जन्‍म 14 जून 1868 को हुआ था. उन्होंने मानव रक्‍त में उपस्थित एग्‍ल्‍युटिनि‍न की मौजूदगी के आधार पर रक्‍तकणों का ए, बी और ओ समूह की पहचान की थी. रक्त के इस वर्गीकरण ने चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसी खोज के लिए महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाईन को साल 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था.


भारत में रक्तदान की स्थिति:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत देश में हर साल लगभग 1.20 करोड़ यूनिट खून की जरूरत होती है। लेकिन, रक्तदाताओं से केवल 90 लाख यूनिट ही रक्त एकत्रित हो पाता है। जिससे हर साल 30 लाख यूनिट रक्त की कमी रह जाती है। खून की कमी से अकेले भारत में ही हर साल लगभग 1.36 लाख महिलाओं की मौत हो जाती है। जो पूरी दुनिया में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हुई मौतों का 25.7 फीसदी है ।


-Govind Pratap Singh

0 views

©Newziya 2019, New Delhi.